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रत्न, ग्रह और अधिष्ठात्री देवी प्रश्नोत्तर — 11 प्रश्न

रत्न, ग्रह और अधिष्ठात्री देवी से जुड़े 11 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 11 प्रश्न

गोमेद सिद्ध करने से क्या लाभ होता है?

गोमेद सिद्ध करने से हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और गुप्त शत्रुओं से रक्षा होती है तथा जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है।

गोमेद लाभनकारात्मक ऊर्जागुप्त शत्रु
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गोमेद को सिद्ध करने का मंत्र क्या है?

गोमेद को सिद्ध करने का मंत्र माँ दुर्गा का नवार्ण मंत्र है: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'

गोमेद सिद्धि मंत्रनवार्ण मंत्रॐ ऐं ह्रीं क्लीं
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गोमेद की अधिष्ठात्री देवी कौन हैं?

गोमेद (राहु ग्रह) की अधिष्ठात्री देवी माँ दुर्गा हैं — राहु की उग्र ऊर्जा को केवल आदिशक्ति (माँ दुर्गा) ही नियंत्रित कर सकती हैं।

गोमेद अधिष्ठात्रीमाँ दुर्गाराहु ग्रह
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मोती की अधिष्ठात्री देवी कौन हैं?

मोती (चंद्र ग्रह) की अधिष्ठात्री देवी भगवती गौरी (पार्वती) हैं — वे चंद्रमा की सौम्य, शीतल और पोषण प्रदान करने वाली शक्ति का मातृ-स्वरूप हैं।

मोती अधिष्ठात्रीभगवती गौरीपार्वती
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हीरे को सिद्ध करने का मंत्र क्या है?

हीरे को सिद्ध करने का मंत्र: 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' — यह माँ महालक्ष्मी का बीज मंत्र है।

हीरा सिद्धि मंत्रमहालक्ष्मी बीज मंत्रॐ श्रीं ह्रीं
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रत्न, ग्रह और अधिष्ठात्री देवी — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर रत्न, ग्रह और अधिष्ठात्री देवी श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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रत्न, ग्रह और अधिष्ठात्री देवी को गहराई से समझने का तरीका

रत्न, ग्रह और अधिष्ठात्री देवी प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

11 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।