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प्राण प्रतिष्ठा और स्थापना प्रश्नोत्तर — 6 प्रश्न

प्राण प्रतिष्ठा और स्थापना से जुड़े 6 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 6 प्रश्न

पारद शिवलिंग स्थापना में योनिका का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

आगम शास्त्र के अनुसार पारद शिवलिंग की योनिका (जहाँ से अभिषेक-जल बहता है) का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।

योनिका उत्तर दिशाआगम शास्त्रअभिषेक जल
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पारद शिवलिंग की वेदी किस धातु की होनी चाहिए?

पारद शिवलिंग की वेदी केवल तांबा, पीतल या चांदी की होनी चाहिए — लोहे/स्टील की वेदी तामसिक मानी जाती है और वर्जित है।

पीतल वेदीतांबा चांदीलोहा वर्जित
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पारद शिवलिंग की स्थापना कैसे करते हैं?

पारद शिवलिंग को घर के पूजा-गृह में लकड़ी की चौकी पर पीतल/तांबे/चांदी की वेदी पर स्थापित करें। योनिका का मुख उत्तर और साधक का मुख पूर्व दिशा में होना चाहिए।

स्थापना विधिलकड़ी की चौकीपीतल तांबा चांदी
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पारद शिवलिंग को 'स्वयं-सिद्ध' क्यों कहते हैं?

पारद शिवलिंग को 'स्वयं-सिद्ध' इसलिए कहते हैं क्योंकि पारद भगवान शिव का 'वीर्य' (जीव-तत्व) माना गया है — यह 'जीवंत धातु' स्वाभाविक रूप से दिव्य शक्ति से युक्त है।

स्वयं सिद्धप्राण प्रतिष्ठापूर्ण संस्कारित
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पारद शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा जरूरी है क्या?

पारद शिवलिंग 'स्वयं-सिद्ध' है — लेकिन विशिष्ट साधनाओं की सफलता के लिए 'पशुपति मंत्रों' या 'रुद्राभिषेक मंत्रों' से प्राण-प्रतिष्ठा और चैतन्य कराना आवश्यक है।

प्राण प्रतिष्ठास्वयं सिद्धचैतन्य
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प्राण प्रतिष्ठा और स्थापना — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर प्राण प्रतिष्ठा और स्थापना श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

प्राण प्रतिष्ठा और स्थापना को गहराई से समझने का तरीका

प्राण प्रतिष्ठा और स्थापना प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

6 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।