विस्तृत उत्तर
पारद शिवलिंग के विषय में दो प्रकार के कथन मिलते हैं। कई ग्रंथ कहते हैं कि शुद्ध पारद शिवलिंग 'स्वयं-सिद्ध' होता है और उसे 'किसी प्राणप्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं हैं'।
किंतु, तांत्रिक साधनाओं के संदर्भ में यह स्पष्ट निर्देश है कि 'अशुद्ध और अचेतन पारद शिवलिंग पर किसी भी प्रकार की कोई भी साधना सफलता नहीं दे सकती है।'
इन दोनों कथनों का समाधान यह है कि यद्यपि एक पूर्ण-संस्कारित रसलिंग 'स्वयं-सिद्ध' होता है, तथापि विशिष्ट साधनाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए और उसे 'जाग्रत' करने के लिए, साधक को अपने शिवलिंग को 'पशुपति मंत्रों' या 'रुद्राभिषेक मंत्रों' से विधिवत 'प्राण-प्रतिष्ठित' और 'चैतन्य' अवश्य कराना चाहिए।




