विस्तृत उत्तर
अष्टधातु से निर्मित प्रतिमाएं अत्यंत चैतन्य और शक्तिशाली मानी जाती हैं।
इसका कारण यह है कि प्रत्येक धातु ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी न किसी ग्रह की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है। जब इन आठ धातुओं को एक साथ पिघलाकर प्रतिमा का निर्माण किया जाता है, तो यह नवग्रहों की संयुक्त ऊर्जा का एक सामंजस्यपूर्ण केंद्र बन जाती है।
अष्टधातु की प्रतिमा अपने चारों ओर एक अत्यंत शक्तिशाली सकारात्मक ऊर्जा क्षेत्र का निर्माण करती है, जो उपासक को सहज ही दैवीय चेतना से जोड़ता है और नकारात्मक शक्तियों से उसकी रक्षा करता है।





