विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म में देव प्रतिमाओं को केवल प्रतीक नहीं, अपितु देवता का जीवंत स्वरूप माना जाता है। शिल्प शास्त्रों में प्रतिमा निर्माण के लिए 'अष्टधातु' को सर्वाधिक श्रेष्ठ बताया गया है।
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, अष्टधातु आठ पवित्र धातुओं का एक शास्त्रोक्त मिश्रण है। इसमें सोना, चांदी, तांबा, सीसा, जस्ता, टिन, लोहा और पारा (रस) का एक विशिष्ट अनुपात में संयोजन किया जाता है।
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