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अष्टधातु से जुड़े सभी प्रश्न(5)

अष्टधातु पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 5 प्रश्न उपलब्ध हैं।

पूजा घर नियम

पूजा घर में अष्टधातु की मूर्ति रखने का क्या लाभ है?

अष्टधातु (8 धातुओं) की मूर्ति में सभी ग्रहों की धातुएँ हैं — यह सर्वग्रह शांति, शक्तिशाली सकारात्मक ऊर्जा और सर्वदोष निवारण करती है। शास्त्रों में यह सर्वश्रेष्ठ धातु मानी गई है। असली अष्टधातु की पहचान करें।

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अष्टधातु

अष्टधातु से ग्रह शांति कैसे होती है?

अष्टधातु की मूर्ति पूजा या अष्टधातु का कड़ा/अंगूठी धारण करने से सभी नौ ग्रहों के दुष्प्रभाव शांत होते हैं — विशेष रूप से राहु-केतु जैसे छाया ग्रहों के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।

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अष्टधातु

अष्टधातु क्या है?

अष्टधातु आठ पवित्र धातुओं का शास्त्रोक्त मिश्रण है — सोना, चांदी, तांबा, सीसा, जस्ता, टिन, लोहा और पारा। शिल्प शास्त्र में देव प्रतिमा निर्माण के लिए यह सर्वाधिक श्रेष्ठ माना गया है।

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मंदिर परम्परा

मंदिर में अष्टधातु की मूर्ति का क्या विशेष महत्व है?

अष्टधातु = 8 धातु (सोना+चाँदी+ताँबा+टिन+जस्ता+सीसा+लोहा+पारद/काँसा)। विशेष: प्रत्येक धातु=एक ग्रह — स्वतः ग्रह शान्ति। ऊर्जा चालकता उच्चतम — प्राण प्रतिष्ठा सर्वाधिक प्रभावी। दीर्घायु (सदियों तक अक्षत)। अष्टधातु>पंचधातु>पत्थर। सावधानी: नकली से बचें।

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मंदिर परम्परा

मंदिर में पंचधातु की मूर्ति और संगमरमर की मूर्ति में कौन उत्तम है?

शास्त्रीय श्रेष्ठता: पंचधातु > संगमरमर (ऊर्जा चालकता, प्राण प्रतिष्ठा प्रभाव)। पंचधातु: सोना+चाँदी+ताँबा+जस्ता+लोहा — मंत्र शक्ति धारण, दीर्घायु। संगमरमर: सुन्दर, शीतल, सस्ता — अम्लीय अभिषेक से क्षति। दोनों शुभ। सम्पूर्ण क्रम: स्वर्ण > रजत > पंचधातु > ताँबा/पीतल > पत्थर > लकड़ी।

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