तीर्थ स्थलनागेश्वर ज्योतिर्लिंग कहाँ है और कैसे पहुँचें?द्वारका गुजरात (~18 km) — 12 ज्योतिर्लिंग दसवाँ। दारुक वध कथा। जामनगर एयरपोर्ट/द्वारका रेलवे। 25m शिव मूर्ति। द्वारकाधीश+बेट द्वारका साथ। सुबह 6-शाम 9।#नागेश्वर#ज्योतिर्लिंग#द्वारका
पूजा विधि एवं कर्मकांडगोपीचंदन तिलक क्या है और कैसे लगाएंगोपीचंदन द्वारका के निकट गोपी सरोवर की पवित्र मिट्टी है जो गोपियों के विरह-समर्पण से पवित्र मानी जाती है। इसे जल में घिसकर माथे पर ऊर्ध्वपुंड्र (दो ऊर्ध्व रेखाएँ) के रूप में लगाएँ — यह वैष्णव भक्तों का प्रमुख तिलक है।#गोपीचंदन
पौराणिक कथाएँविश्वकर्मा देव ने क्या-क्या बनाया?विश्वकर्मा ने लंका, द्वारका, इंद्रप्रस्थ, इंद्रपुरी, पुष्पक विमान, सुदर्शन चक्र, शिव का त्रिशूल, इंद्र का वज्र और सूर्य का रथ बनाया था।#विश्वकर्मा#लंका#द्वारका
तीर्थ एवं धामद्वारका मंदिर में प्रवेश के क्या नियम हैं?द्वारकाधीश मंदिर में भारतीय पोशाक में ही प्रवेश मिलता है। बरमूडा, मिनी स्कर्ट, फटी जींस वर्जित हैं। पुरुष धोती-कुर्ता या शर्ट-ट्राउजर और महिलाएँ साड़ी या सलवार-कमीज में आएँ। जूते बाहर उतारना अनिवार्य है।#द्वारका#द्वारकाधीश मंदिर#प्रवेश नियम
तीर्थ यात्राद्वारकाधीश मंदिर दर्शन विधानचारधाम (पश्चिम); कृष्ण नगरी। 6:30AM-1PM + 5-9:30PM। गोमती/समुद्र स्नान→द्वारकाधीश→रुक्मिणी→नागेश्वर→बेट द्वारका। जामनगर/द्वारका रेलवे।#द्वारका#द्वारकाधीश#दर्शन
ज्योतिर्लिंगनागेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा क्या है?दारुका राक्षस ने शिवभक्त सुप्रिय वैश्य को समुद्र में पकड़कर कैद किया। कारागार में सुप्रिय की पुकार सुनकर शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए, सुप्रिय को पाशुपतास्त्र दिया जिससे दारुक का वध हुआ। वह ज्योतिर्लिंग नागेश्वर नाम से प्रसिद्ध हुआ।#नागेश्वर#दारुका राक्षस#सुप्रिय वैश्य