विस्तृत उत्तर
कामदेव को भगवान शिव द्वारा भस्म किए जाने की कथा शिव पुराण और अन्य ग्रंथों में विस्तार से मिलती है। तारकासुर नामक महाशक्तिशाली दैत्य ने ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था कि उसका वध केवल शिव और पार्वती के पुत्र द्वारा ही संभव है। किंतु उस समय भगवान शिव सती की मृत्यु के बाद गहन समाधि में लीन थे और उनका मन किसी सांसारिक बंधन में नहीं था। देवताओं की रक्षा के लिए आवश्यक था कि शिव और पार्वती का विवाह हो। देवताओं ने कामदेव से विनती की कि वे शिव की तपस्या भंग करें और उनके मन में पार्वती के प्रति आकर्षण उत्पन्न करें। कामदेव जानते थे कि यह कार्य अत्यंत जोखिम भरा है, फिर भी उन्होंने देवहित में स्वीकार किया। वसंत ऋतु का वातावरण बनाकर कामदेव ने तपस्या में लीन शिव पर पुष्प बाण चलाया। शिव की समाधि भंग हुई किंतु शिव को इस पर भीषण क्रोध आ गया। उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोल दिया और उसकी अग्नि से क्षण भर में कामदेव भस्म हो गए। तभी से कामदेव को 'अनंग' कहा जाता है — जिसका अर्थ है शरीर रहित। अंततः पार्वती की तपस्या सफल हुई, शिव ने उनसे विवाह किया, और कार्तिकेय ने जन्म लेकर तारकासुर का वध किया।





