विस्तृत उत्तर
पौराणिक ग्रंथों में इंद्र देव की कई महत्त्वपूर्ण गलतियाँ और उनके दंड का वर्णन मिलता है। पहली और सबसे प्रसिद्ध घटना है अहिल्या प्रसंग, जो वाल्मीकि रामायण के बालकांड में वर्णित है। इंद्र ने छल से ऋषि गौतम का वेश धारण कर उनकी पत्नी अहिल्या के साथ दुराचार किया। गौतम ऋषि ने क्रोध में आकर अहिल्या को शिला बनने का श्राप दिया और इंद्र को हज़ार योनियों का श्राप दिया। बाद में ऋषि ने उन योनियों को आँखों में बदल दिया, इसीलिए इंद्र के चित्रों में उनके शरीर पर असंख्य आँखें दिखती हैं। दूसरी घटना है त्वष्टा-पुत्र विश्वरूप का वध — इंद्र ने क्रोध में अपने ही गुरु विश्वरूप का सिर काट दिया, जिससे उन्हें ब्रह्महत्या का पाप लगा। इसी पाप के भय से इंद्र को इंद्रपद छोड़ना पड़ा और नहुष राजा कुछ समय के लिए इंद्र बने। तीसरी घटना गोवर्धन प्रसंग है, जहाँ भगवान कृष्ण ने गोकुल के लोगों को इंद्र की पूजा करने से रोक दिया और इंद्र ने अहंकार में भारी वर्षा कराई, परंतु गोवर्धन पर्वत ने सबकी रक्षा की। इंद्र को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने कृष्ण से क्षमा माँगी। इन प्रसंगों के कारण इंद्र की कोई नियमित पूजा या विशेष मंदिर परंपरा भारत में प्रचलित नहीं है।





