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विस्तृत उत्तर
जय-विजय वैकुण्ठ से इसलिए गिरे क्योंकि सनकादिक मुनियों के श्राप ने उन्हें भौतिक जगत में जन्म लेने के लिए बाध्य किया। उनका अपराध यह था कि उन्होंने मुनियों को भगवान विष्णु के दर्शन से रोक दिया और उन्हें साधारण बालक समझा। वैकुण्ठ में किसी के प्रति संदेह, अहंकार या भेदभाव उचित नहीं माना जाता। भगवान विष्णु ने इस श्राप को रोका नहीं, क्योंकि यह उनकी व्यापक लीला का भाग बन गया। इसी पतन से वे तीन जन्मों में भगवान के शत्रु बने और फिर मुक्त हुए।
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