हिंदू संस्कार एवं परंपरानाथ संप्रदाय में शिव पूजा कैसे होती हैनाथ संप्रदाय में शिव को 'आदिनाथ' और 'अलख निरंजन' कहते हैं। उपासना तीन रूपों में होती है — शिवलिंग पूजन (भस्म, बेलपत्र, जल), हठयोग से शरीर के भीतर शिव-शक्ति का साक्षात्कार, और गुरु को शिव-स्वरूप मानना। 'आदेश' उनका ईश्वर-वंदन है।#नाथ संप्रदाय#शिव पूजा#गोरखनाथ
योग और साधनाकुक्कुटेश्वर शिवलिंग और हठयोग के 'कुक्कुटासन' में क्या संबंध है?कुक्कुटासन मूलाधार चक्र और कुण्डलिनी जाग्रत करता है। कुक्कुटेश्वर लिंग की साधना इसी यौगिक ऊर्जा का केंद्र है जो आलस्य (तमोगुण) का नाश कर चेतना को ऊपर उठाती है।
आध्यात्मिक विज्ञानस्कंद पुराण के अनुसार नंदीशेनेश्वर शिवलिंग किस भाव को जाग्रत करता है?यह शिवलिंग साधक के भीतर 'वीर-भाव' (आंतरिक वीरता और निर्भयता), अजेय मानसिक बल और भगवान शिव के प्रति पूर्ण समर्पण के भाव को जाग्रत करता है।#वीर भाव#निर्भयता#पूर्ण समर्पण
योग और साधनापहलवान और हठयोगी नंदीशेनेश्वर शिवलिंग की पूजा क्यों करते हैं?शिवगण नंदीषेण शारीरिक बल और हठयोग के अधिष्ठाता हैं। यह शिवलिंग 'वीर भाव' और देह-बल को जाग्रत करता है, इसलिए अखाड़े के पहलवान और हठयोगी शारीरिक व यौगिक बल के लिए इसकी पूजा करते हैं।#हठयोग#शारीरिक बल#अखाड़ा परंपरा
साधना मार्गत्राटक क्या है और कैसे करें?त्राटक हठयोग की शुद्धिकरण क्रिया है जिसमें बिना पलक झपकाए किसी एक बिंदु (दीपक, चित्र) पर दृष्टि स्थिर की जाती है। बाह्य त्राटक (खुली आँखें) और आंतर त्राटक (बंद आँखें) दो प्रकार हैं। यह मन की एकाग्रता और नेत्र-शक्ति बढ़ाने की प्राचीन विधि है।#त्राटक#एकाग्रता#हठयोग
योग दर्शनहिंदू धर्म में योग के प्रकार क्या हैं?हिंदू धर्म में मुख्य रूप से चार योग मार्ग हैं — ज्ञानयोग (बुद्धि), भक्तियोग (प्रेम), कर्मयोग (निष्काम कर्म) और राजयोग (अष्टांग)। इसके अतिरिक्त हठयोग और कुण्डलिनी योग भी प्रमुख परंपराएं हैं।#योग#ज्ञानयोग#भक्तियोग