विस्तृत उत्तर
महर्लोक में ज्ञान यज्ञ के साथ-साथ तपो यज्ञ की भी प्रधानता है। तपो यज्ञ में साधक अपनी देह, इन्द्रियों और मन को तपस्या की अग्नि में जलाकर शुद्ध करता है। यह वह प्रक्रिया है जिसमें योग और तपस्या के माध्यम से शरीर और चेतना का इतना परिष्कार होता है कि साधक अन्न-जल के बिना केवल योग-अग्नि और परब्रह्म के ध्यान से ही पोषण प्राप्त कर सकता है। महर्लोक के वानप्रस्थी और ब्रह्मचारी इसी तपो यज्ञ के माध्यम से इस लोक तक पहुँचते हैं। तपो यज्ञ का फल भौतिक सुख नहीं बल्कि देह के समस्त विकारों का नाश और चेतना का ऊर्ध्वमुखी होना है। यही कारण है कि महर्लोक में रोग, बुढ़ापा और भूख नहीं होती — तपो यज्ञ ने इन विकारों को पहले ही भस्म कर दिया होता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





