विस्तृत उत्तर
शरभ अवतार भगवान शिव का वह अवतार है जिसमें उन्होंने भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार के असंयत क्रोध को शांत किया था। लिंग पुराण में इस अवतार की कथा विस्तार से वर्णित है।
जब भगवान विष्णु ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए और अत्याचारी हिरण्यकश्यप के वध के लिए नृसिंह अवतार धारण किया, तब उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध कर दिया। किंतु वध के पश्चात भी नृसिंह भगवान का क्रोध शांत नहीं हुआ। उनके अत्यंत उग्र और भयंकर रूप से सम्पूर्ण ब्रह्मांड कंपायमान होने लगा। देवता, ऋषि और यहाँ तक कि लक्ष्मी जी भी उनके पास जाने में संकोच कर रहे थे।
इस संकट में सभी देवता भगवान शिव के पास पहुँचे और उनसे नृसिंह के क्रोध को शांत करने की प्रार्थना की। तब शिव जी ने शरभ अवतार धारण किया। शरभ एक अद्भुत प्राणी था — आधा मृग और आधा शरभ पक्षी के रूप में, जिसके आठ पैर, दो पंख और सहस्त्र भुजाएं थीं। यह जीव शेर से भी अधिक शक्तिशाली माना जाता है।
शरभ रूपी शिव ने पहले नृसिंह की स्तुति की, परंतु उनका क्रोध शांत नहीं हुआ। तब शरभ ने नृसिंह को अपनी पूंछ में लपेट लिया और ऊपर ले उड़े। इससे नृसिंह का क्रोध शांत हुआ और वे भगवान विष्णु के स्वरूप में वापस आ गए। नृसिंह ने शरभेश्वर से क्षमा माँगी और उनकी स्तुति की।





