विस्तृत उत्तर
गणेश जी को 'विघ्नहर्ता' कहे जाने के पीछे शास्त्रों में एक गहरा पौराणिक आधार है।
लिंग पुराण के अनुसार एक समय देवताओं और ब्राह्मणों को दैत्यों के दुष्टकर्मों से भारी कष्ट हो रहा था। सत्मार्ग पर चलने वालों के शुभ कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो रही थीं जबकि दुष्टों के कार्य बिना किसी विघ्न के पूरे हो जाते थे। इस असंगति को देखकर देवता चिंतित हुए और उन्होंने भगवान शिव की आराधना करके उनसे दैत्यों के दुष्कर्मों में विघ्न उत्पन्न करने का वरदान माँगा। भगवान शिव ने 'तथास्तु' कहकर देवताओं की प्रार्थना स्वीकार की।
समय आने पर गणेश जी का प्राकट्य हुआ। उनका मुख हाथी के समान था और एक हाथ में त्रिशूल तथा दूसरे में पाश था। भगवान शिव ने गणेश जी को दैत्यों के दुष्कर्मों में विघ्न उत्पन्न करने और देवताओं व ब्राह्मणों का उपकार करने का दायित्व सौंपा। इसी कारण वे 'विघ्नहर्ता' — बाधाएं हरने वाले — कहलाए।
विघ्न' का अर्थ है बाधा और 'हर्ता' का अर्थ है हरने वाला अर्थात नाश करने वाला। गणेश जी ने सज्जनों के शुभ कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने और दुर्जनों के कुकर्मों में विघ्न डालने का दायित्व निभाया। इसीलिए हर शुभ कार्य के आरंभ में गणेश की पूजा का विधान बना — ताकि उनकी कृपा से सभी बाधाएं दूर हों।





