विस्तृत उत्तर
पार्वती जी ने उबटन से गणेश को इसलिए बनाया क्योंकि उन्हें एक ऐसे विश्वस्त गण की आवश्यकता थी जो केवल उन्हीं की आज्ञा का पालन करे, न कि शिव की या किसी अन्य की।
शिव पुराण के अनुसार एक बार माता पार्वती स्नान के लिए जाने से पहले अपने प्रिय नंदी को द्वार पर पहरेदारी का आदेश देकर गईं। परंतु बीच में ही भगवान शिव वहाँ आए और नंदी ने उन्हें — अपने मूल स्वामी को — रोकना उचित नहीं समझा और भीतर जाने दिया। इससे माता पार्वती का स्नान बाधित हुआ और वे असहज हुईं।
इस घटना ने माता पार्वती को गहराई से सोचने पर विवश किया। शिव जी के पास गण थे जो उनके आदेश पर चलते थे। परंतु पार्वती के पास ऐसा कोई गण नहीं था जो केवल उन्हीं के प्रति स्वामिभक्त हो। उन्होंने सोचा — 'मुझे अपना एक ऐसा पुत्र चाहिए जो केवल मेरी माँ मानकर मेरी आज्ञा का पालन करे।'
तब माता पार्वती ने अपनी दिव्य शक्ति का उपयोग किया और शरीर पर लगे उबटन से एक बालक की प्रतिमा बनाई। उबटन में उनकी अपनी शक्ति और माँ की ममता दोनों मिली हुई थी — इसलिए उससे उत्पन्न बालक पूर्णतः उनका अपना था। इस प्रकार माता पार्वती ने गणेश को अपने उबटन से बनाकर अपने विश्वस्त पुत्र और गण दोनों को एक साथ प्राप्त किया।




