विस्तृत उत्तर
घर में शिवलिंग रखना अत्यन्त शुभ माना जाता है, परंतु इसके कुछ विशिष्ट और कड़े नियम हैं जिनका पालन अनिवार्य है।
शिवलिंग रखने के नियम
1आकार
- ▸घर में अंगूठे के बराबर या उससे छोटा शिवलिंग ही रखें (1-2 इंच)
- ▸बड़ा शिवलिंग = अधिक ऊर्जा = गृहस्थ वातावरण के लिए अनुकूल नहीं
- ▸बड़े शिवलिंग की नित्य विस्तृत पूजा अनिवार्य — जो घर में सम्भव नहीं
2सामग्री
- ▸पारद (Mercury) शिवलिंग — सर्वश्रेष्ठ (अत्यन्त शुभ)
- ▸स्फटिक (Crystal) — अत्यन्त शुभ
- ▸नर्मदेश्वर (नर्मदा नदी से प्राप्त बाणलिंग) — स्वयम्भू, अत्यन्त पवित्र
- ▸काले पत्थर, संगमरमर, पीतल — शुभ
3जलाधारी (जलहरी)
- ▸शिवलिंग को जलाधारी (अभिषेक जल निकासी पात्र) के साथ रखें
- ▸जलाधारी का मुख उत्तर दिशा की ओर हो
- ▸जलाधारी के बिना शिवलिंग रखना कुछ परम्पराओं में अशुभ
4नंदी
- ▸शिवलिंग के सामने छोटा नंदी (बैल) रखना शुभ परंतु अनिवार्य नहीं
- ▸नंदी का मुख शिवलिंग की ओर हो
5स्थापना दिशा
- ▸शिवलिंग उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखें
- ▸पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा में
6नित्य पूजा — अनिवार्य
- ▸शिवलिंग स्थापित करने के बाद नित्य जलाभिषेक अनिवार्य
- ▸एक दिन भी पूजा न छूटे — यह सबसे महत्वपूर्ण नियम
- ▸यदि नित्य पूजा सम्भव नहीं, तो शिवलिंग न रखें — शालग्राम या मूर्ति रखें
7अभिषेक नियम
- ▸जल दक्षिण मुख करके, उत्तर दिशा से गिराएँ
- ▸बिल्वपत्र, धतूरा, आक के फूल अर्पित करें
- ▸तुलसी शिवलिंग पर वर्जित (शिवपुराण)
- ▸कुंकुम/सिंदूर शिवलिंग पर न लगाएँ (कुछ परम्पराओं में अपवाद)
- ▸'ॐ नमः शिवाय' मंत्र जप अनिवार्य
8क्या न करें
- ▸शिवलिंग को छूकर सूँघें नहीं
- ▸शिवलिंग के ऊपर से हाथ न ले जाएँ
- ▸अभिषेक जल (चरणामृत) पीने योग्य — व्यर्थ न बहाएँ
- ▸शिवलिंग पर केतकी (केवड़ा) पुष्प वर्जित
विशेष
nर्मदेश्वर (बाणलिंग) को बिना प्राण प्रतिष्ठा के भी पूजा जा सकता है — यह स्वयम्भू माना जाता है।





