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गृह मंदिर📜 वास्तु शास्त्र, मानसार, धर्म सिंधु, अग्नि पुराण, विष्णु पुराण3 मिनट पठन

घर में मंदिर कैसे बनाएं?

संक्षिप्त उत्तर

घर में मंदिर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में बनाएं — यह सर्वोत्तम है। देवता का मुख पूर्व की ओर हो। शयन कक्ष और दक्षिण दिशा में मंदिर न बनाएं। मूर्ति की ऊँचाई हृदय के समांतर या ऊपर हो। खंडित मूर्ति घर में न रखें।

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विस्तृत उत्तर

घर में मंदिर स्थापना के नियम वास्तु शास्त्र, मानसार और धर्म सिंधु में विस्तार से वर्णित हैं:

मंदिर का सही स्थान (वास्तु शास्त्र के अनुसार)

1ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) — सर्वोत्तम

ईशान = ईश (शिव) + आन (स्थान) — यह शिव और देवताओं की दिशा है। उत्तर-पूर्व कोण सर्वाधिक सकारात्मक ऊर्जा का क्षेत्र है।

2पूर्व दिशा — दूसरा श्रेष्ठ स्थान

सूर्योदय की दिशा — देवताओं का मुख पूर्व की ओर हो जिससे पूजक पूर्व मुख कर सके।

3उत्तर दिशा — स्वीकार्य

कुबेर की दिशा — यहाँ मंदिर बना सकते हैं।

कहाँ मंदिर न बनाएं

  • दक्षिण दिशा — यम की दिशा, घर के मंदिर के लिए अशुभ
  • शयन कक्ष (bedroom) — पूजा स्थान और सोने का स्थान अलग होना चाहिए
  • रसोई — अग्नि और देवता ऊर्जा का संतुलन बिगड़ता है (कुछ परंपराओं में स्वीकार्य)
  • भूतल/तहखाना — भूमि के नीचे मंदिर उचित नहीं

मंदिर की ऊँचाई

मंदिर इतनी ऊँचाई पर होना चाहिए कि देवता की मूर्ति हृदय के समांतर या उससे ऊपर हो — देखते समय थोड़ा ऊपर देखना पड़े।

मंदिर में स्थापना के नियम

  1. 1मूर्तियों की संख्या: तीन से अधिक मूर्तियाँ एक साथ न रखें (कुछ परंपराओं में)
  2. 2खंडित मूर्ति: टूटी, खंडित मूर्ति घर में न रखें — नदी में प्रवाहित करें
  3. 3दो शिवलिंग नहीं: घर में एक ही शिवलिंग रखें
  4. 4दो शंख नहीं: एक ही शंख घर में रखें
  5. 5मूर्ति का आकार: घर के मंदिर में देवता की मूर्ति अंगूठे जितनी ऊँचाई तक — बड़ी मूर्तियाँ मंदिर के लिए हैं

मंदिर की सफाई

  • प्रतिदिन मंदिर साफ करें
  • बासी फूल, पुराना जल नित्य हटाएं
  • मंदिर के सामने का मार्ग स्वच्छ रखें

मंदिर में क्या न रखें

  • मृत व्यक्तियों की तस्वीरें — पितरों की तस्वीर मंदिर में नहीं, दक्षिण दिशा में रखें
  • नकारात्मक या युद्ध के चित्र
  • फटी हुई धार्मिक पुस्तकें

वास्तु शास्त्र का सार

यत्र देवालयः शुद्धः तत्र लक्ष्मीः निवसति।' — जहाँ शुद्ध और स्वच्छ मंदिर है, वहाँ लक्ष्मी का वास होता है।
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शास्त्रीय स्रोत
वास्तु शास्त्र, मानसार, धर्म सिंधु, अग्नि पुराण, विष्णु पुराण
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