विस्तृत उत्तर
शिव पुराण और आगम शास्त्र के अनुसार शिवलिंग स्थापना की विधि:
स्थापना के लिए शुभ अवसर
- ▸शिवरात्रि, सावन माह, प्रदोष तिथि
- ▸सोमवार, त्रयोदशी या शुभ मुहूर्त
- ▸किसी योग्य ज्योतिषी से मुहूर्त निकलवाएं
सामग्री
- ▸शिवलिंग (पारद, स्फटिक, काले पत्थर या संगमरमर)
- ▸जलहरी (ताँबे या पत्थर की)
- ▸शुद्ध जल, गंगाजल, पंचामृत
- ▸चंदन, बेलपत्र, धूप, दीप
स्थापना की क्रमिक विधि
- 1स्थान चयन: ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में पूजा स्थान पर; शिवलिंग का मुख उत्तर दिशा में हो
- 2भूमि शुद्धि: गंगाजल से स्थान शुद्ध करें
- 3पंडित से प्राण प्रतिष्ठा: यदि संभव हो तो विद्वान पंडित जी से प्राण प्रतिष्ठा कराएं
- 4पंचामृत स्नान: शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराएं
- 5जलहरी स्थापित करें: जलहरी का मुख उत्तर दिशा में हो
- 6शिवलिंग स्थापन: जलहरी के केंद्र में शिवलिंग रखें
- 7प्रथम पूजन: बेलपत्र, धतूरा, चंदन, अक्षत से पूजन करें
- 8मंत्र: 'ॐ नमः शिवाय' 108 बार जप
- 9आरती: प्रथम आरती करें
महत्वपूर्ण नियम
- ▸एक घर में एक से अधिक शिवलिंग न हो (यदि हो तो 3, 5, 7 — विषम संख्या में)
- ▸एक इंच से छोटा या अंगूठे जितने आकार का शिवलिंग गृह पूजा के लिए उपयुक्त है





