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शिव स्तोत्र📜 आदि शंकराचार्य रचित लिंगाष्टकम, शैव परंपरा2 मिनट पठन

लिंगाष्टकम का पाठ करने की विधि और नियम क्या हैं?

संक्षिप्त उत्तर

शंकराचार्य रचित 8 श्लोक — शिवलिंग महिमा। शिवलिंग समक्ष, दीपक जलाकर, शुद्ध उच्चारण से पाठ। सोमवार/शिवरात्रि/सावन में विशेष। 1-3-11 बार। अज्ञान नाश, मोक्ष प्राप्ति, शिव कृपा।

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विस्तृत उत्तर

लिंगाष्टकम आदि शंकराचार्य द्वारा रचित शिवलिंग की स्तुति का अत्यंत पवित्र अष्टक (8 श्लोक) है:

रचयिता: आदि शंकराचार्य

श्लोक संख्या: 8 (अष्टक)

विषय: शिवलिंग की महिमा — प्रत्येक श्लोक 'लिंगं' शब्द से प्रारंभ और 'तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम्' से समाप्त होता है।

पाठ विधि

  1. 1स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें।
  2. 2शिवलिंग के समक्ष बैठें (मंदिर या घर दोनों में)।
  3. 3दीपक जलाएं, धूप अर्पित करें।
  4. 4पहले 3 बार 'ॐ नमः शिवाय' जपें।
  5. 5फिर लिंगाष्टकम के 8 श्लोकों का शुद्ध उच्चारण से पाठ करें।
  6. 6प्रत्येक श्लोक के बाद शिवलिंग पर जल या पुष्प अर्पित कर सकते हैं।
  7. 7पाठ के बाद शिव आरती करें।

नियम

  • शुद्ध उच्चारण अनिवार्य — संस्कृत उच्चारण ध्यानपूर्वक करें।
  • प्रातःकाल पूजा के समय या संध्या आरती से पूर्व पाठ करें।
  • सोमवार, शिवरात्रि और सावन में विशेष फलदायी।
  • कम से कम 1 बार, आदर्श 3 या 11 बार पाठ करें।
  • एकाग्रचित्त होकर, भक्तिभाव से पाठ करें।

लाभ

  • शिवलिंग पूजा का पूर्ण फल प्राप्त।
  • अज्ञान नाश, ज्ञान प्राप्ति (शंकराचार्य की अद्वैत दृष्टि)।
  • संसार बंधन से मुक्ति।
  • शिव कृपा और आशीर्वाद।
  • मानसिक शांति और एकाग्रता।
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शास्त्रीय स्रोत
आदि शंकराचार्य रचित लिंगाष्टकम, शैव परंपरा
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