विस्तृत उत्तर
लिंगाष्टकम आदि शंकराचार्य द्वारा रचित शिवलिंग की स्तुति का अत्यंत पवित्र अष्टक (8 श्लोक) है:
रचयिता: आदि शंकराचार्य
श्लोक संख्या: 8 (अष्टक)
विषय: शिवलिंग की महिमा — प्रत्येक श्लोक 'लिंगं' शब्द से प्रारंभ और 'तत्प्रणमामि सदाशिवलिंगम्' से समाप्त होता है।
पाठ विधि
- 1स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें।
- 2शिवलिंग के समक्ष बैठें (मंदिर या घर दोनों में)।
- 3दीपक जलाएं, धूप अर्पित करें।
- 4पहले 3 बार 'ॐ नमः शिवाय' जपें।
- 5फिर लिंगाष्टकम के 8 श्लोकों का शुद्ध उच्चारण से पाठ करें।
- 6प्रत्येक श्लोक के बाद शिवलिंग पर जल या पुष्प अर्पित कर सकते हैं।
- 7पाठ के बाद शिव आरती करें।
नियम
- ▸शुद्ध उच्चारण अनिवार्य — संस्कृत उच्चारण ध्यानपूर्वक करें।
- ▸प्रातःकाल पूजा के समय या संध्या आरती से पूर्व पाठ करें।
- ▸सोमवार, शिवरात्रि और सावन में विशेष फलदायी।
- ▸कम से कम 1 बार, आदर्श 3 या 11 बार पाठ करें।
- ▸एकाग्रचित्त होकर, भक्तिभाव से पाठ करें।
लाभ
- ▸शिवलिंग पूजा का पूर्ण फल प्राप्त।
- ▸अज्ञान नाश, ज्ञान प्राप्ति (शंकराचार्य की अद्वैत दृष्टि)।
- ▸संसार बंधन से मुक्ति।
- ▸शिव कृपा और आशीर्वाद।
- ▸मानसिक शांति और एकाग्रता।





