ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
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शिव स्तोत्र📜 शैव आगम, शिव पंचाक्षर/षड्अक्षर परंपरा1 मिनट पठन

शिव षड्अक्षर स्तोत्र का जप कब और कैसे करना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

'ॐ नमः शिवाय' (6 अक्षर)। रुद्राक्ष माला, 108 बार, मध्यमा+अंगूठा (तर्जनी नहीं)। मेरु लांघें नहीं। प्रातः/संध्या/कभी भी। शंकराचार्य पंचाक्षर स्तोत्र: न-म-शि-वा-य = 5 श्लोक = पंचमहाभूत।

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विस्तृत उत्तर

षड्अक्षर = 'ॐ नमः शिवाय' (6 अक्षर — ॐ + न + मः + शि + वा + य)। पंचाक्षर = 'नमः शिवाय' (5 अक्षर, बिना ॐ):

जप विधि

  1. 1स्नान कर शुद्ध वस्त्र, शिवलिंग/शिव चित्र समक्ष।
  2. 2रुद्राक्ष माला (108 दाने) से जप।
  3. 3'ॐ नमः शिवाय' — स्पष्ट, मध्यम स्वर में। प्रत्येक दाने पर एक बार।
  4. 4108 बार (1 माला) = न्यूनतम। 1008 बार (10 माला) = उत्तम।
  5. 5दाहिने हाथ से माला, मध्यमा+अंगूठे से दाना फेराएं (तर्जनी न लगाएं)।
  6. 6मेरु (बड़ा दाना) लांघें नहीं — वापस मोड़ें।

कब: प्रातः (ब्रह्ममुहूर्त सर्वोत्तम), संध्या (प्रदोष), या कभी भी। सोमवार/शिवरात्रि/सावन विशेष।

शिव पंचाक्षर स्तोत्र (शंकराचार्य)

प्रत्येक श्लोक 'नमः शिवाय' के एक अक्षर (न, म, शि, वा, य) से आरंभ — पंचमहाभूतों का प्रतीक। प्रतिदिन 1 बार पाठ + 108 जप = सम्पूर्ण।

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शास्त्रीय स्रोत
शैव आगम, शिव पंचाक्षर/षड्अक्षर परंपरा
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