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शिव स्तोत्र📜 बिल्वाष्टकम् (आदि शंकराचार्य), शिव पूजा पद्धति1 मिनट पठन

बिल्वाष्टक स्तोत्र का पाठ शिवलिंग के सामने कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

8 श्लोक, 8 बेलपत्र। प्रत्येक श्लोक पर एक त्रिदल बेलपत्र अर्पित। 'त्रिदलं त्रिगुणाकारं... एकबिल्वं शिवार्पणम्' — एक बेलपत्र = तीन जन्मों के पाप नष्ट। सोमवार/शिवरात्रि/सावन।

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विस्तृत उत्तर

बिल्वाष्टक स्तोत्र (शंकराचार्य रचित) बेलपत्र अर्पण के साथ पढ़ा जाने वाला 8 श्लोकों का स्तोत्र:

विधि

  1. 1शिवलिंग के समक्ष शुद्ध आसन पर बैठें।
  2. 2शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
  3. 38 बेलपत्र (त्रिदल — तीन पत्ती वाले, अखंडित) हाथ में रखें।
  4. 4प्रत्येक श्लोक पढ़ने के बाद एक बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित करें।
  5. 5प्रत्येक श्लोक 'बिल्वशाखां प्रयच्छामि' या 'बिल्वपत्रं शिवार्पणम्' से समाप्त — इस पंक्ति पर बेलपत्र चढ़ाएं।
  6. 68 श्लोक = 8 बेलपत्र।
  7. 7अंत में 'ॐ नमः शिवाय' 3 बार जपें।

कब पढ़ें: सोमवार, शिवरात्रि, सावन, प्रदोष — या प्रतिदिन।

प्रसिद्ध पंक्ति: 'त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्। त्रिजन्मपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥' — एक बिल्वपत्र अर्पित = तीन जन्मों के पाप नष्ट।

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शास्त्रीय स्रोत
बिल्वाष्टकम् (आदि शंकराचार्य), शिव पूजा पद्धति
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