विस्तृत उत्तर
शिवलिंग स्थापना की विधि शिव पुराण और शैव आगम में वर्णित है:
शिवलिंग का चयन
- 1नर्मदेश्वर (नर्मदा नदी का पत्थर) — सर्वोत्तम; प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं — ये स्वयंभू माने जाते हैं
- 2स्फटिक (Crystal) — अत्यंत शुभ; ध्यान के लिए उत्तम
- 3पारद (Mercury) — सर्वोच्च पारलौकिक फल; प्रयोगशाला में तैयार पारद
- 4पाषाण (Stone) — ग्रेनाइट, काला पत्थर
- 5पार्थिव (मिट्टी) — नित्य बनाकर, पूजकर विसर्जित करें
घर में स्थापना के नियम (धर्म सिंधु)
- ▸आकार: अंगूठे से छोटा या बराबर (घर के लिए)
- ▸स्थान: ईशान कोण (उत्तर-पूर्व)
- ▸दिशा: लिंग का मुख उत्तर की ओर
- ▸जलाधारी (सोमसूत्र): उत्तर दिशा में हो
शिवलिंग स्थापना विधि
1स्नान और संकल्प
स्नान करके शुभ मुहूर्त में संकल्प लें।
2स्थान शुद्धि
पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कें।
3शिवलिंग शुद्धि
नए शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराएं, गंगाजल से शुद्ध करें।
4स्थापना मंत्र
> 'ॐ नमः शिवाय — एतस्मिन् पीठे श्रीशिव देवस्य प्राण प्रतिष्ठा अस्तु'
5नर्मदेश्वर के लिए
नर्मदेश्वर में प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं — ये नदी से स्वयंसिद्ध हैं। केवल शुद्धि और स्थापना पर्याप्त।
6नित्य पूजन
स्थापना के बाद नित्य पूजा अनिवार्य। यदि किसी दिन पूजा न हो तो माफी माँगें।
पार्थिव लिंग पूजन
गृहस्थों के लिए सर्वोत्तम — प्रतिदिन मिट्टी या आटे का शिवलिंग बनाएं, पूजा करें, विसर्जित करें। इसमें स्थायी स्थापना की जिम्मेदारी नहीं।





