विस्तृत उत्तर
गणेश जी को प्रथम पूज्य बनाए जाने के पीछे पुराणों में दो प्रमुख कथाएं मिलती हैं।
पहली कथा: जब माता पार्वती के क्रोध को शांत करने के लिए गणेश जी को हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया गया, तब माता पार्वती ने शर्त रखी — 'ऐसा तभी संभव है जब मेरे पुत्र को समस्त देवताओं के मध्य सर्वोच्च पूज्य माना जाए।' पार्वती के क्रोध और संभावित प्रलय को रोकने के लिए शिव जी ने वरदान दिया — 'जो भी गणेश की पूजा करेगा, उसके सारे कार्य सिद्ध होंगे।' ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने एक स्वर में घोषणा की कि अब से पहले गणेश की पूजा होगी, उसके बाद ही अन्य देवताओं की।
दूसरी कथा: एक बार देवताओं में विवाद हुआ कि सबसे पहले किसकी पूजा होनी चाहिए। सभी शिव के पास गए। शिव जी ने एक प्रतियोगिता रखी — 'जो ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर सबसे पहले वापस आए, उसे प्रथम पूज्य माना जाए।' कार्तिकेय अपने मोर पर निकल पड़े। गणेश जी ने विचार किया और माता-पिता की सात परिक्रमा की। शिव जी ने कहा — 'माता-पिता ही ब्रह्मांड हैं। गणेश ने सही परिक्रमा की।' सभी देवता सहमत हुए और तभी से गणेश प्रथम पूज्य हुए।





