विस्तृत उत्तर
गणेश और कार्तिकेय के बीच पृथ्वी परिक्रमा की यह प्रतिस्पर्धा पुराणों में वर्णित एक अत्यंत ज्ञानप्रद कथा है।
एक बार समस्त देवताओं में इस बात को लेकर विवाद हुआ कि सबसे पहले किस देवता की पूजा होनी चाहिए। सभी देवता इस समस्या का समाधान लेने भगवान शिव के पास पहुँचे। शिव जी ने इसका निर्णय करने के लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन किया। उन्होंने कहा — 'जो भी संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा सबसे पहले करके वापस आएगा, वही पृथ्वी पर प्रथम पूजनीय देवता होगा।'
कार्तिकेय अपने तीव्रगामी मोर वाहन पर बैठकर तत्काल ब्रह्मांड की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। गणेश जी के पास वाहन था छोटा सा मूषक जो धीमा था। गणेश जी ने क्षण भर विचार किया और फिर अपने माता-पिता — भगवान शिव और माता पार्वती — की सात परिक्रमाएं कर लीं और उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए।
जब शिव जी ने पूछा कि गणेश ने क्या किया, तो गणेश जी ने कहा — 'शास्त्र-प्रमाण है कि माता-पिता समस्त ब्रह्मांड हैं। उनकी परिक्रमा करने से समस्त ब्रह्मांड की परिक्रमा का फल मिलता है।' भगवान शिव ने इस विवेकपूर्ण उत्तर को स्वीकार किया और सभी देवताओं ने गणेश जी को प्रथम पूजनीय देवता घोषित किया। जब कार्तिकेय ब्रह्मांड की परिक्रमा करके वापस आए तब तक गणेश जी को विजेता घोषित किया जा चुका था।





