विस्तृत उत्तर
भगवान गणेश की कथाएँ जीवन में बुद्धि की सर्वोच्चता और नम्रता की शिक्षा देती हैं।
बुद्धि > बल — सबसे प्रसिद्ध गणेश-प्रसंग है जब शिव-पार्वती ने कार्तिकेय और गणेश की परीक्षा ली — तीन बार पृथ्वी की परिक्रमा करो। कार्तिकेय अपने मोर पर सवार होकर निकल पड़े। गणेश ने अपने माता-पिता की परिक्रमा की और कहा — 'समस्त सृष्टि आपके भीतर समाहित है, आपकी परिक्रमा ही ब्रह्माण्ड की परिक्रमा है।' गणेश प्रथम पूज्य बने। शिक्षा — बल से नहीं, बुद्धि और विवेक से जीतो।
एकाग्रता की शिक्षा — महाभारत लिखते समय महर्षि व्यास ने गणेश से कहा — लिखते समय रुकना मत। गणेश ने शर्त रखी — बोलते समय रुकना मत। इस प्रकार महाभारत सम्पूर्ण हुआ। शिक्षा — किसी बड़े काम में एकाग्र समर्पण अनिवार्य है।
प्रथम पूज्यता की शिक्षा — गणेश हर कार्य के आरंभ में पूजे जाते हैं। शिक्षा — किसी भी कार्य की शुरुआत में बुद्धि का आह्वान करना, सोच-समझकर शुरुआत करना — यही गणेश-पूजन का सन्देश है।
नम्रता की शिक्षा — गणेश का हाथी का मस्तक और छोटा शरीर — असीम बुद्धि और सादगी का प्रतीक है। शिक्षा — जो सबसे अधिक जानता है वह सबसे अधिक नम्र होता है।





