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गणेश पूजा📜 गणेश पुराण, मंत्र शास्त्र1 मिनट पठन

गणेश गायत्री मंत्र का जप किस उद्देश्य से करें?

संक्षिप्त उत्तर

मंत्र: 'ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात्'। उद्देश्य: बुद्धि-विवेक वृद्धि, विघ्न नाश, शिक्षा/परीक्षा सफलता, नए कार्य शुभारंभ, ग्रह शांति। 108 बार नित्य, बुधवार विशेष। दीक्षा अनिवार्य नहीं।

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विस्तृत उत्तर

गणेश गायत्री मंत्र गणपति की गायत्री छंद में रचित स्तुति है:

मंत्र: 'ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात्'

अर्थ: हम एकदन्त (गणेश) को जानते हैं, वक्रतुण्ड (टेढ़ी सूंड वाले) का ध्यान करते हैं, वे दन्ती (गणेश) हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।

जप के उद्देश्य

  1. 1बुद्धि और विवेक वृद्धि — गायत्री मंत्र मूलतः बुद्धि प्रेरणा ('धीमहि', 'प्रचोदयात्') के लिए है।
  2. 2विघ्न निवारण — सभी कार्यों में आने वाली बाधाओं का नाश।
  3. 3शिक्षा और परीक्षा — विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी।
  4. 4नए कार्य का शुभारंभ — व्यापार, नौकरी, गृह प्रवेश से पूर्व।
  5. 5ग्रह दोष शांति — बुध ग्रह और केतु ग्रह की शांति।

जप विधि: प्रतिदिन 108 बार, बुधवार विशेष, रुद्राक्ष या स्फटिक माला, प्रातःकाल सर्वोत्तम।

ध्यान रखें: गणेश गायत्री सभी के लिए सुलभ है — दीक्षा अनिवार्य नहीं।

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शास्त्रीय स्रोत
गणेश पुराण, मंत्र शास्त्र
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