विस्तृत उत्तर
गणेश गायत्री मंत्र गणपति की गायत्री छंद में रचित स्तुति है:
मंत्र: 'ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात्'
अर्थ: हम एकदन्त (गणेश) को जानते हैं, वक्रतुण्ड (टेढ़ी सूंड वाले) का ध्यान करते हैं, वे दन्ती (गणेश) हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
जप के उद्देश्य
- 1बुद्धि और विवेक वृद्धि — गायत्री मंत्र मूलतः बुद्धि प्रेरणा ('धीमहि', 'प्रचोदयात्') के लिए है।
- 2विघ्न निवारण — सभी कार्यों में आने वाली बाधाओं का नाश।
- 3शिक्षा और परीक्षा — विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी।
- 4नए कार्य का शुभारंभ — व्यापार, नौकरी, गृह प्रवेश से पूर्व।
- 5ग्रह दोष शांति — बुध ग्रह और केतु ग्रह की शांति।
जप विधि: प्रतिदिन 108 बार, बुधवार विशेष, रुद्राक्ष या स्फटिक माला, प्रातःकाल सर्वोत्तम।
ध्यान रखें: गणेश गायत्री सभी के लिए सुलभ है — दीक्षा अनिवार्य नहीं।





