विस्तृत उत्तर
शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव ने गणेश जी को अग्रपूज्य बनाने के लिए तीन विशेष वरदान दिए।
पहला वरदान था — प्रथम पूजा का अधिकार: शिव जी ने घोषणा की कि 'किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान को प्रारंभ करने से पहले गणेश की पूजा अनिवार्य होगी। गणेश की पूजा के बिना किया गया कोई भी शुभ कार्य सफल नहीं होगा।' यह वरदान उन्हें सभी देवताओं में सर्वोच्च स्थान देता है।
दूसरा वरदान था — विघ्नहर्ता का पद: शिव जी ने गणेश को यह शक्ति दी कि वे शुभ कार्यों में उत्पन्न होने वाले सभी विघ्न-बाधाओं का नाश करें और दुष्टों के कार्यों में विघ्न डालें। इसी कारण वे 'विघ्नहर्ता' कहलाए।
तीसरा वरदान था — गणों के अधिपति का पद: शिव जी ने गणेश को समस्त गणों का अधिपति बनाया, इसीलिए वे 'गणपति' और 'गणेश' कहलाए।
माता पार्वती ने भी गणेश को आशीर्वाद दिया कि जो उनकी पूजा करेगा, पहले गणेश का स्मरण करेगा। ब्रह्मा जी ने उन्हें 'विघ्नहर्ता' की उपाधि दी। विष्णु जी ने कहा — 'तुम्हारी पूजा सभी से पहले होगी।' इस प्रकार ब्रह्मा-विष्णु-महेश तीनों के संयुक्त आशीर्वाद से गणेश जी सर्वदेव-वंद्य और अग्रपूज्य बने।




