विस्तृत उत्तर
कैलाश संहिता शिव पुराण की छठी संहिता है और इसमें 6,000 श्लोक हैं। इसका नाम भगवान शिव के निवास स्थान कैलाश पर्वत के नाम पर है।
मुख्य विषय — कैलाश संहिता में मुख्यतः शिव-तत्व का गहन दार्शनिक विवेचन है। इसमें कैलाश धाम की महिमा, उसका स्वरूप और वहाँ के दिव्य वातावरण का वर्णन है। शिव-पार्वती के कैलाश-निवास और वहाँ होने वाले दिव्य संवादों का वर्णन इस संहिता में प्रमुखता से है।
योग और अध्यात्म — इस संहिता में भगवान शिव आदियोगी के रूप में प्रकट होते हैं। योग के विभिन्न प्रकार, ध्यान की विधियाँ और मोक्ष के मार्ग का वर्णन है। शिव के प्रमुख शिष्यों — नारद, स्कंद, नंदी — को दिए गए ज्ञान का वर्णन भी इसमें है।
पंच-तत्व और शिव — पाँच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) पर शिव की अधिसत्ता और उनके पंचमुख स्वरूप (सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष, ईशान) का वर्णन इस संहिता की विशेषता है।





