विस्तृत उत्तर
क्षीर सागर के पार 32 लाख योजन चौड़ा शाक द्वीप है जो मट्ठे (Whey/Dadhi) के सागर से घिरा है। यहाँ एक सुगंधित शाक (अंजीर या सागौन) का वृक्ष है जिसकी सुगंध पूरे द्वीप में फैलती है। यहाँ के शासक मेधातिथि थे। यहाँ ऋतव्रत, सत्यव्रत, दानव्रत और अनुव्रत नामक निवासी रहते हैं जो वायु देव की पूजा करते हैं। ये लोग अत्यंत योगी और तपस्वी हैं जो प्राणायाम और अष्टांग योग के माध्यम से समाधिस्थ होकर भगवान के 'वायु' स्वरूप (प्राणतत्व) की आराधना करते हैं। वे मानते हैं कि जिस प्रकार वायु सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है उसी प्रकार परब्रह्म भी सर्वत्र विद्यमान है। इन सभी द्वीपों में रहने वाले लोग पूर्णतः स्वर्गिक जीवन व्यतीत करते हैं।
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