विस्तृत उत्तर
द्विपुष्कर योग = त्रिपुष्कर जैसा; इसमें कार्य दो गुना फल देता है।
कब: भद्रा (2,7,12) तिथि + बुधवार/गुरुवार/शुक्रवार + विशिष्ट नक्षत्र (वही जो त्रिपुष्कर)।
शुभ: संपत्ति, निवेश, व्यापार, दान, पूजा — सब 2 गुना फल। सावधानी: अशुभ = 2 गुना अशुभ।
त्रिपुष्कर vs द्विपुष्कर: त्रि = रवि/मंगल/शनि = 3 गुना; द्वि = बुध/गुरु/शुक्र = 2 गुना। तिथि+नक्षत्र समान; वार भिन्न। दोनों में खरीदारी/निवेश अत्यंत शुभ।





