विस्तृत उत्तर
दुग्ध (दूध) के सागर से घिरे शाक द्वीप में एक विशाल शाक वृक्ष है। यहाँ के निवासी ऋतव्रत, सत्यव्रत, दानव्रत और अनुव्रत नामक चार वर्णों में विभाजित हैं। ये लोग अत्यंत योगी और तपस्वी हैं जो प्राणायाम और अष्टांग योग के माध्यम से समाधिस्थ होकर भगवान के 'वायु' स्वरूप (प्राणतत्व) की आराधना करते हैं। वे मानते हैं कि जिस प्रकार वायु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में व्याप्त है उसी प्रकार परब्रह्म भी सर्वत्र विद्यमान है। इस प्रकार शाक द्वीप में वायु देव की उपासना प्राणायाम और अष्टांग योग के माध्यम से की जाती है। यहाँ के निवासी भगवान के वायु स्वरूप में उनकी सर्वव्यापकता का ध्यान करते हैं और समाधि की अवस्था में उनसे एकत्व प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। यह द्वीप योगाभ्यास का एक अत्यंत उन्नत क्षेत्र है।
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