विस्तृत उत्तर
विद्येश्वर संहिता शिव पुराण की प्रथम और आधारभूत संहिता है। इसमें 10,000 श्लोक हैं।
इस संहिता में मुख्यतः निम्नलिखित विषयों का वर्णन है —
शिवलिंग पूजा का महत्व और विधान: शिवलिंग की स्थापना, पूजा और उसके फल का विस्तृत वर्णन। शिवलिंग को परब्रह्म का साक्षात् स्वरूप बताया गया है।
शिवरात्रि व्रत: महाशिवरात्रि के व्रत की विधि, कथा और उसके अनंत फल का वर्णन।
पंचकृत्य: भगवान शिव के पाँच कार्यों — सृष्टि, स्थिति, संहार, तिरोभाव और अनुग्रह — का वर्णन।
ओंकार का महत्व: प्रणव 'ॐ' की महिमा और उसके जप का फल।
रुद्राक्ष और भस्म का महत्व: रुद्राक्ष की उत्पत्ति, उसके विभिन्न प्रकार और धारण विधि। भस्म (विभूति) के माहात्म्य का विस्तृत वर्णन।
दान का महत्व: विभिन्न प्रकार के दान और उनके फल का वर्णन।
यह संहिता शिव-भक्ति की आधारशिला है और नए भक्तों के लिए विशेष उपयोगी है।




