विस्तृत उत्तर
गजासुर ने ब्रह्माजी की घोर तपस्या करके वरदान प्राप्त किया था।
शिव पुराण की रुद्र संहिता के पंचम खंड के अनुसार महिषासुर के पुत्र गजासुर ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने और देवताओं को परास्त करने के उद्देश्य से ब्रह्माजी की कठोर तपस्या आरंभ की। उसने वर्षों तक अन्न-जल त्यागकर, भूमि पर लेटकर, अग्नि के बीच बैठकर अत्यंत दुष्कर तप किया।
उसकी घोर तपस्या से ब्रह्माजी प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा। गजासुर ने ब्रह्माजी से ऐसा वरदान माँगा जिससे वह अजेय और अमर हो सके — कि देवता, मानव या राक्षस कोई भी उसे न मार सके, और उसका शरीर इतना अभेद्य हो कि कोई शस्त्र उसे भेद न पाए।
ब्रह्माजी ने यह वरदान दे दिया। इस वरदान की प्राप्ति के बाद गजासुर अत्यंत अहंकारी और उन्मत्त हो गया। उसे लगा कि अब वह अजेय है। उसने अपनी विशाल काया और वरदान की शक्ति से तीनों लोकों में उत्पात मचाना आरंभ किया। जिस दिशा में जाता, भय और त्राहि-त्राहि मच जाती। देवता, ऋषि-मुनि और मानव सभी उससे भयभीत हो गए।




