विस्तृत उत्तर
गजासुर ने ब्रह्मा के वरदान से अजेय होने के बाद तीनों लोकों में उत्पात मचाना शुरू किया और एक समय भगवान शिव की प्रिय नगरी काशी में भी पहुँच गया।
शिव पुराण की रुद्र संहिता के अनुसार गजासुर की विशाल गज-काया और अजेयता के कारण उसके कदमों से धरती कांपती थी। जिस दिशा में वह जाता, उस दिशा में समस्त प्राणियों में भय व्याप्त हो जाता था। उसने सबसे पहले स्वर्गलोक पर आक्रमण किया और देवताओं को परास्त किया।
काशी में उसने विशेष उत्पात मचाया — काशी जो शिव की अपनी नगरी थी। वहाँ उसने भक्तों को पीड़ित किया, शिवलिंगों की पूजा में बाधा डाली, ऋषि-मुनियों के आश्रम उजाड़े और तपस्वियों को भगाया। काशी-वासी त्राहि-त्राहि करने लगे। उसने अपनी हाथी जैसी विशाल काया से काशी के मार्गों को अवरुद्ध कर दिया।
देवता, गण और सभी शिव-भक्त गजासुर के इस अत्याचार से अत्यंत संकटग्रस्त हुए। काशी में रहना असंभव हो गया। सभी मिलकर भगवान शिव के पास गए और उनसे हाथ जोड़कर गजासुर के आतंक से मुक्ति की प्रार्थना की। उनकी पुकार सुनकर शिव जी ने गजासुर का वध करने का निश्चय किया।




