विस्तृत उत्तर
भस्मासुर ने शिव जी की घोर तपस्या से प्रसन्न करने के बाद एक ऐसा विचित्र और विनाशकारी वरदान माँगा जो उसकी मूर्खता और दुर्बुद्धि का प्रमाण बना।
शिव पुराण एवं श्रीमद्भागवत की कथा के अनुसार जब भगवान शिव भस्मासुर की तपस्या से प्रसन्न होकर प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा, तो भस्मासुर ने पहले अमरत्व का वरदान माँगा। शिव ने अमरत्व देने से इनकार किया क्योंकि यह सृष्टि के विधान के विरुद्ध था।
तब भस्मासुर ने चालाकी से दूसरा वरदान माँगा — 'प्रभो! मुझे यह वरदान दीजिए कि मैं जिसके भी सिर पर अपना हाथ रखूँ, वह तत्काल भस्म हो जाए।' भोलेनाथ ने बिना किसी शंका के 'एवमस्तु' कहकर यह वरदान दे दिया।
परंतु वरदान मिलते ही भस्मासुर ने माता पार्वती की सुंदरता के बारे में सुना और उन्हें पाने की कामना जागी। यह सोचकर कि शिव के रहते पार्वती मिलना असंभव है, उसने अपने ही वरदानदाता शिव जी के सिर पर हाथ रखने का दुस्साहस किया। यह कृतघ्नता और अहंकार की पराकाष्ठा थी। शिव जी के समझ में आ गया कि वरदान से ही वरदानदाता का प्राण संकट में पड़ गया है।





