विस्तृत उत्तर
शिव ने उन्हें यह वरदान दिया कि वे अपने भक्तों के पापों का क्षण भर में भक्षण कर लेंगे, इसलिए वे 'पाप-भक्षक' के नाम से प्रसिद्ध हुए।
भैरव को 'पाप-भक्षक' क्यों कहते हैं को संदर्भ सहित समझें
भैरव को 'पाप-भक्षक' क्यों कहते हैं का सबसे सीधा सार यह है: शिव ने भैरव को वरदान दिया कि वे अपने भक्तों के पापों का क्षण भर में भक्षण कर लेंगे — इसीलिए वे 'पाप-भक्षक' कहलाते हैं।
भैरव परिचय जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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भैरव को 'कालभैरव' क्यों कहते हैं?
शिव ने कहा: 'तुम काल के भी काल की तरह चमकते हो — इसलिए कालराज और चूँकि काल भी तुमसे भयभीत होगा इसलिए कालभैरव।' यह नाम समय और मृत्यु पर उनके पूर्ण अधिकार को दर्शाता है।
भगवान भैरव कौन हैं?
भगवान भैरव शिव के प्रचंड और गहन स्वरूप हैं — शास्त्र उन्हें समय (काल) के परम नियंत्रक, पापों के भक्षक और अहंकार के विनाशक के रूप में प्रतिष्ठित करते हैं। वे परम चेतना का प्रतिनिधित्व करते हैं।
भैरव को 'काल के नियंत्रक' क्यों कहते हैं?
शिव ने भैरव को 'कालराज' नाम दिया — 'तुम काल के भी काल की तरह चमकते हो और काल भी तुमसे भयभीत होगा।' यह नाम समय और मृत्यु पर उनके पूर्ण अधिकार को दर्शाता है।
नागपाश किसका अस्त्र था
नागपाश भगवान ब्रह्मा का निर्मित अस्त्र था जो मेघनाद (इंद्रजीत) को वरदान में मिला था। मेघनाद इसे अत्यंत कठिन स्थिति में ही प्रयोग करता था क्योंकि यह उसका सर्वाधिक घातक अस्त्र था।
गणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों बनाया गया?
गणेश जी प्रथम पूज्य दो कारणों से बने — पहला: पार्वती जी के क्रोध को शांत करने के लिए शिव ने यह वरदान दिया। दूसरा: ब्रह्मांड-परिक्रमा प्रतियोगिता में गणेश जी ने माता-पिता की परिक्रमा करके बुद्धि से विजय पाई।
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