विस्तृत उत्तर
वृकासुर ने शिव जी की तपस्या इसलिए की क्योंकि वह बहुत जल्दी अजेय शक्ति प्राप्त करना चाहता था। उसका उद्देश्य भक्ति या मोक्ष नहीं था, बल्कि त्रिलोक पर अधिकार और देवताओं को पराजित करना था। देवर्षि नारद ने उसे बताया कि शिव जी आशुतोष हैं और जल्दी प्रसन्न होकर वरदान देते हैं। वृकासुर ने इसी बात को अपने स्वार्थ का साधन बनाया। वह केदार क्षेत्र में गया और अपने शरीर को कष्ट देकर शिव जी को प्रसन्न करने लगा। उसकी तपस्या में प्रेम की जगह हठ और शक्ति-लालसा थी। इसी कारण उसे मिला वरदान भी कल्याणकारी नहीं, बल्कि विनाशकारी सिद्ध हुआ।
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