📖
विस्तृत उत्तर
शिव जी ने वृकासुर को वरदान इसलिए दिया क्योंकि वे आशुतोष हैं और तपस्या से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। वृकासुर की तपस्या तामसी और हिंसक थी, फिर भी उसका निश्चय अत्यंत कठोर था। जब वह अपना सिर काटने वाला था, तब शिव जी करुणा से प्रकट हुए। उन्होंने पहले उसे रोका और उसका शरीर स्वस्थ किया। फिर अपने वचन के अनुसार वरदान मांगने को कहा। शिव जी जानते थे कि वृकासुर का भाव शुद्ध नहीं है, फिर भी वे तपस्या और दिए हुए वचन की मर्यादा से बंधे थे। यही सरल करुणा आगे चलकर उनके लिए संकट बन गई।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?
