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विस्तृत उत्तर
शिव जी ने भस्मासुर को भस्म करने वाला वरदान अपने आशुतोष स्वभाव और वचन की मर्यादा के कारण दिया। वृकासुर ने अत्यंत कठोर तपस्या की थी और शिव जी ने प्रसन्न होकर कह दिया था कि वह जो चाहे मांग सकता है। जब उसने घातक वरदान मांगा, तब शिव जी समझ गए कि यह असुर इसका दुरुपयोग करेगा। फिर भी वे अपने दिए हुए वचन से पीछे नहीं हटे। शिव जी की सरलता और करुणा यहाँ स्पष्ट दिखती है। यह कथा यह भी सिखाती है कि दया और वरदान के साथ विवेक आवश्यक है, क्योंकि शक्ति गलत हाथों में संकट बन सकती है।
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