विस्तृत उत्तर
भस्मासुर हिंदू पुराणों में वर्णित एक दैत्य था जो भगवान शिव का भक्त था। उसे वृकासुर के नाम से भी जाना जाता है — शिव पुराण और श्रीमद्भागवत दोनों में उसकी कथा का उल्लेख है, यद्यपि दोनों में थोड़ा भेद है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार भस्मासुर एक अत्यंत महत्वाकांक्षी असुर था जो समस्त ब्रह्मांड पर अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता था। इस उद्देश्य की सिद्धि के लिए उसने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए केदार क्षेत्र में अत्यंत कठोर तपस्या आरंभ की। कई वर्षों तक घनघोर तप के बाद भी जब शिव प्रसन्न नहीं हुए, तब उसने और भी उग्र तपस्या की — अपने ही शरीर का एक-एक अंग काटकर अग्नि में अर्पित करने लगा।
शिव पुराण की कथा के अनुसार भस्मासुर का जन्म शिव के भस्म से जुड़ा बताया जाता है। उसकी अटूट भक्ति और कठोर तप को देखकर भगवान शिव उसके सामने प्रकट हुए। परंतु वरदान प्राप्त करते ही भस्मासुर ने अपनी वरदान-शक्ति का प्रयोग सबसे पहले अपने आराध्य शिव पर ही करने का दुष्प्रयास किया — यह उसकी कृतघ्नता और बुद्धिहीनता का प्रतीक बना। अंततः भगवान विष्णु की मोहिनी लीला से वह स्वयं अपनी ही मृत्यु का कारण बना।



