विस्तृत उत्तर
सुतल लोक के निर्विवाद, परम प्रतापी और एकछत्र अधिपति महाराजा बलि हैं। महाराजा बलि दैत्यराज विरोचन के पुत्र और महान भगवद-भक्त प्रह्लाद महाराजा के पौत्र हैं। सुतल लोक में महाराजा बलि के साथ उनके वफादार दैत्य, दानव और कई नाग प्रजातियाँ निवास करती हैं। इनमें मुख्य रूप से विरोचन-पुत्र बलि के वे प्रबल अनुयायी और परिवार के सदस्य हैं जिन्होंने स्वर्ग के युद्ध में उनका साथ दिया था। सुतल लोक दानवों और दैत्यों का सुरक्षित आश्रय स्थल है, इसलिए यहाँ की जनसंख्या मुख्य रूप से उन्हीं असुरों से निर्मित है जिन्होंने अतीत में देवताओं के विरुद्ध भयंकर युद्ध किए थे। भगवान विष्णु ने प्रह्लाद जी को भी निर्देश दिया था कि वे सुतल लोक में जाकर अपने पौत्र बलि और अन्य संबंधियों के साथ सुखपूर्वक निवास करें। पंचरात्र आगम और पद्म संहिता के अनुसार, सुतल लोक में दानवों और दैत्यों के साथ-साथ कालेय और फणी नामक नाग प्रजातियाँ भी बहुतायत में निवास करती हैं।
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