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विस्तृत उत्तर
रसातल मुख्य रूप से असुरों, दैत्यों और दानवों का आश्रय स्थल है। श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार यहाँ दिति के पुत्र दैत्य और दनु के पुत्र दानव निवास करते हैं। रसातल के निवासियों में विशेष रूप से पणि, निवातकवच, कालेय और हिरण्यपुरवासी जैसे अत्यंत भयंकर और शक्तिशाली असुर समूहों का उल्लेख है। ये जन्म से ही देवताओं के कट्टर शत्रु हैं। वे अत्यंत बलवान, क्रूर और दुस्साहसी हैं, पर भगवान श्री हरि के सुदर्शन चक्र के तेज से भयभीत होकर गहरी गुफाओं में सर्पों की तरह छिपकर रहते हैं।
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