विस्तृत उत्तर
वितल लोक मुख्य रूप से असुरों, दैत्यों, दानवों, यक्षों और नागों का निवास स्थान है। श्री विष्णु पुराण के अनुसार इस लोक में सैकड़ों प्रकार के दानवों और दैत्यों की जातियां निवास करती हैं, जिनके साथ महाबली नागों के झुंड भी रहते हैं। वायु पुराण के अनुसार दूसरे अधोलोक, अर्थात वितल लोक, में महान दैत्य हयग्रीव और प्रसिद्ध नागराज तक्षक के भव्य नगर स्थित हैं। यहाँ के निवासी अत्यधिक बलवान, क्रोधी और मायावी विद्याओं में पारंगत होते हैं। वे मदिरा, सुमधुर संगीत, वीणा, वेणु और मृदंग की ध्वनि में मग्न रहते हैं, और उनकी स्त्रियाँ हाटक स्वर्ण तथा बहुमूल्य रत्नों से सुसज्जित रहती हैं।
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