विस्तृत उत्तर
पाशुपतास्त्र के निर्माण का मुख्य उद्देश्य नकारात्मक शक्तियों का दमन और धर्म की स्थापना करना था। भगवान शिव इसी अस्त्र का प्रयोग करके समय-समय पर अधर्मी दैत्यों और आसुरी शक्तियों का संहार करते रहे हैं। इसके अतिरिक्त युग के अंत में जब सृष्टि का प्रलय होता है तब भगवान शिव इसी पाशुपतास्त्र से संपूर्ण सृष्टि का विनाश करते हैं ताकि एक नए सृजन का मार्ग प्रशस्त हो सके। यह पाशुपतास्त्र के दोहरे स्वरूप को स्पष्ट करता है — यह संहारक भी है और ब्रह्मांडीय व्यवस्था का नियामक भी।
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