विस्तृत उत्तर
अंधकासुर को 'अंधक' नाम देने के पीछे दो कारण पुराणों में बताए गए हैं जो उसके जन्म की परिस्थितियों से सीधे जुड़े हैं।
पहला कारण — जन्म का अंधकार: वामन पुराण के अनुसार जब पार्वती ने शिव की आँखें ढकीं, तो जगत में घोर अंधकार छा गया। उसी अंधकार के समय, उस अंधेरे में, शिव के शरीर के पसीने से यह बालक प्रकट हुआ। चूँकि उसका जन्म अंधकार की अवधि में हुआ था, इसलिए उसका नाम 'अंधक' रखा गया।
दूसरा कारण — जन्म से नेत्रहीनता: उस बालक का जन्म उस क्षण हुआ जब जगत में प्रकाश नहीं था और उसके जन्म में कोई सामान्य दृष्टि का योग नहीं था। वह जन्म से अंधे की भाँति था — वामन पुराण में उसे 'अंध' (अंधा) स्वभाव या दृष्टि वाला बताया गया है। इसलिए नाम 'अंधक' पड़ा।
तीसरी दृष्टि से देखें तो उसके चरित्र की अंधता भी उसके नाम का कारण बनी — वह जो अहंकार से इतना अंधा था कि अपनी ही माता पार्वती पर बुरी दृष्टि डाल बैठा, जो उसकी मृत्यु का कारण भी बनी।
दैत्यराज हिरण्याक्ष ने उसे पाला-पोसा, परंतु उसे यह नहीं पता था कि शिव और पार्वती ही उसके वास्तविक माता-पिता हैं। इस अज्ञान ने उसे 'अंधक' — अज्ञान के अंधकार में डूबा — और भी सटीक नाम बना दिया।




