विस्तृत उत्तर
गजासुर को ब्रह्माजी से एक अत्यंत शक्तिशाली वरदान प्राप्त हुआ जिसने उसे लगभग अजेय बना दिया।
शिव पुराण के अनुसार गजासुर ने ब्रह्माजी से यह वरदान माँगा कि — 'हे प्रभो! मुझे यह वरदान दीजिए कि काम (कामवासना) में लिप्त स्त्री-पुरुष मेरा वध नहीं कर सकें।' इस वरदान का विशेष तात्पर्य था — तत्कालीन युद्ध में सभी योद्धा किसी न किसी कामना, अहंकार या भावना से युक्त होते हैं। इसलिए प्रायः कोई भी उसका वध नहीं कर सकता था।
एक अन्य पाठ के अनुसार वरदान था कि कोई देवता, मानव या राक्षस उसे न मार सके और उसका शरीर इतना अभेद्य हो कि कोई सामान्य शस्त्र काम न कर सके।
इस वरदान की शक्ति से गजासुर व्यावहारिक रूप से अवध्य बन गया। तीनों लोकों के देवता उससे लड़ने में असमर्थ थे। वरदान पाकर उसने पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल में अत्याचार आरंभ किया। देवताओं को उनके लोकों से खदेड़ दिया, ऋषियों के यज्ञ नष्ट कर दिए और मानवों को कष्ट दिया।
इस वरदान का तोड़ केवल भगवान शिव के पास था — क्योंकि वे काम से परे 'कामारि' हैं। इसीलिए देवताओं ने शिव की शरण ली।





