गणेश कथागणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों बनाया गया?गणेश जी प्रथम पूज्य दो कारणों से बने — पहला: पार्वती जी के क्रोध को शांत करने के लिए शिव ने यह वरदान दिया। दूसरा: ब्रह्मांड-परिक्रमा प्रतियोगिता में गणेश जी ने माता-पिता की परिक्रमा करके बुद्धि से विजय पाई।#गणेश प्रथम पूज्य#विघ्नहर्ता#शिव वरदान
भक्ति एवं आध्यात्मगणेश जी की कृपा प्राप्त होने पर क्या संकेत मिलते हैंगणेश-कृपा के संकेत — अटके काम बनने लगना, बुद्धि और एकाग्रता की वृद्धि, नए कार्यों में बाधा न आना, स्वप्न में हाथी या मोदक दिखना, और ज्ञान-धर्म की ओर स्वाभाविक झुकाव।#गणेश कृपा#गणपति संकेत#विघ्नहर्ता
मंत्र साधनारुका हुआ काम बनाने का गणेश मंत्रलंबे समय से अटके या रुके हुए कार्यों को पूरा करने के लिए भगवान गणेश के मंत्र 'ॐ वक्रतुण्ड महाकाय...' का उच्चारण कर घर से दायां पैर पहले बाहर निकालना चाहिए।#गणेश#रुका काम#विघ्नहर्ता
गणेश पूजागणेश जी की पूजा से विघ्न कैसे दूर होते हैं?गणेश = विघ्नहर्ता + विघ्नेश्वर। शिव पुराण: प्रथम पूज्य वरदान — बिना गणेश पूजा कार्य अशुभ। अथर्वशीर्ष: 'ध्यान से सर्व विघ्न मुक्ति, महाविघ्न से भी।' विघ्न अधिपति: पूजा = विघ्न हटाएं, उपेक्षा = विघ्न आएं। उपाय: 108 जप, दूर्वा, मोदक, बुधवार/चतुर्थी पूजन।#विघ्नहर्ता#विघ्न नाश#गणेश
आरती लाभगणेश आरती जय गणेश देवा का लाभ?विघ्न नाश, बुद्धि, कार्यसिद्धि, शुभारंभ। बुधवार/संकष्टी/गणेश चतुर्थी। किसी भी पूजा शुरुआत। बच्चे भी गा सकते=सबसे सरल।#जय गणेश#आरती#विघ्नहर्ता
सरस्वती पूजा विधिसरस्वती पूजा में सबसे पहले किसकी पूजा करते हैं?सरस्वती पूजा से पहले: सर्वप्रथम भगवान गणेश का आवाहन और संक्षिप्त पूजन (पुष्प, अक्षत, नैवेद्य)। फिर नवग्रह, सूर्य, अग्नि, विष्णु और शिव को मानसिक प्रणाम। इसके पश्चात देवी सरस्वती की मुख्य पूजा।#गणेश पूजन#सरस्वती पूजा#विघ्नहर्ता
कार्तिकेय और गणेश जन्मलिंग पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?लिंग पुराण: देवताओं ने दैत्यों के यज्ञों में विघ्न के लिए प्रार्थना की → शिव ने स्वयं दिव्य गजमुख स्वरूप प्रकट किया (हाथ में त्रिशूल और पाश) → विघ्नहर्ता और विघ्नकर्ता दोनों उपाधि दी।#गणेश जन्म#लिंग पुराण#विघ्नहर्ता
प्रमुख बीज मंत्रों का अर्थ'गं' (गणपति बीज) का क्या अर्थ है?'गं' = भगवान श्री गणेश का गणपति बीज। 'ग' = गणेश, बिंदु = विघ्नहर्ता/दुःखहर्ता। अर्थ: 'भगवान गणेश मेरे समस्त विघ्नों और दुःखों को दूर करें।' यह साधना मार्ग की सभी बाधाओं का नाश करता है।#गं गणपति बीज#गणेश#विघ्नहर्ता
शिव शाबर मंत्रसाधना से पहले 'गणेश पूजन' क्यों अनिवार्य है?साधना को निर्विघ्न और सफल बनाने के लिए श्री गणेश का पूजन अनिवार्य रूप से किया जाता है।#गणेश पूजन#विघ्नहर्ता#साधना प्रारंभ
भूतनाथ मंत्र साधनागणेश पूजन के बिना साधना अधूरी क्यों है?साधना में आने वाली बाधाओं को दूर करने और उसे निर्विघ्न बनाने के लिए गणेश पूजन अनिवार्य है।#गणेश पूजन#विघ्नहर्ता#साधना
परिचयसंकष्टी चतुर्थी क्या है?यह भगवान गणेश का एक अत्यंत चमत्कारी व्रत है, जिसे करने से जीवन के सभी बड़े से बड़े संकट और विघ्न (बाधाएं) दूर हो जाते हैं।#संकष्टी चतुर्थी#गणेश व्रत#विघ्नहर्ता
स्तोत्र एवं पाठगणेश चालीसा पढ़ने से विघ्न कैसे दूरगणेश=विघ्नहर्ता+प्रथम पूज्य। चालीसा पाठ=गणेश प्रसन्न=बाधा नाश। नया कार्य, परीक्षा, व्यापार, बुद्धि। बुधवार/चतुर्थी। ~10-12 min।#गणेश चालीसा#विघ्नहर्ता#बाधा
लक्ष्मी उपासनादीपावली पर लक्ष्मी पूजा से पहले गणेश पूजा क्यों करते हैंगणेश पहले क्यों: (1) शिव का वरदान — सर्वप्रथम पूज्य। (2) विघ्नहर्ता — पूजा में बाधा न आए। (3) बुद्धि पहले, धन बाद — विवेकपूर्ण धन उपयोग। (4) रिद्धि-सिद्धि = लक्ष्मी को आकर्षित। (5) लक्ष्मी: जहाँ गणेश पूजा, वहीं मेरा निवास। क्रम: गणेश → लक्ष्मी → सरस्वती → कुबेर।#दीपावली#गणेश#लक्ष्मी
स्वप्न दर्शनस्वप्न में गणेश जी के दर्शन का क्या शकुन है?गणेश स्वप्न = सर्वाधिक शुभ: (1) विघ्न नाश+कार्य सिद्धि (2) नवीन शुभारम्भ (3) बुद्धि/विद्या (विद्यार्थियों विशेष) (4) ऋद्धि-सिद्धि (समृद्धि+सफलता) (5) पारिवारिक सुख। मोदक=आनन्द, लिखते=परीक्षा सफलता, नृत्य=उत्सव। करें: गणपति मंदिर+मोदक+'ॐ गं गणपतये नमः'+दूर्वा। गणेश पुराण: 'स्वप्न दर्शन=परम कृपा।'#गणेश स्वप्न#विघ्नहर्ता#बुद्धि
मंदिर वास्तुमंदिर में गणपति प्रतिमा सबसे पहले क्यों स्थापित की जाती है?कारण: (1) ऋग्वेद: 'गणानां त्वा गणपतिं हवामहे' = प्रथम आवाहनीय (2) विघ्नहर्ता — प्रारम्भ में पूजन = विघ्न पूर्व-निवारण (3) शिवपुराण कथा — माता-पिता प्रदक्षिणा = प्रथम पूज्य वरदान। स्थान: प्रवेश द्वार पर/अलग मंडप। सर्वत्र: निर्माण, प्राण प्रतिष्ठा, विवाह, हवन, पत्र — सब में पहले।#गणपति#प्रथम पूज्य#विघ्नहर्ता
मंत्र सिद्धिगणेश मंत्र सिद्धि कैसे करें?मुख्य मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः' (6 अक्षर = 6 लाख पुरश्चरण)। बुधवार, गणेश चतुर्थी। लाल वस्त्र। भोग: मोदक, दूर्वा (21/108)। गणपत्यथर्वशीर्ष के 21 पाठ शक्तिशाली। गणेश-सिद्धि से सभी साधनाओं के विघ्न दूर। ध्यान: एकदंत, मोदकहस्त गणपति।#गणेश मंत्र#गणपति सिद्धि#विघ्नहर्ता
गणेश कथागणेश जी के विघ्नहर्ता नाम का क्या कारण है?लिंग पुराण के अनुसार भगवान शिव ने गणेश जी को देवताओं के शुभ कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर करने और दैत्यों के दुष्कर्मों में विघ्न डालने का दायित्व दिया। इसीलिए वे 'विघ्नहर्ता' कहलाए।#विघ्नहर्ता#गणेश#लिंग पुराण