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विस्तृत उत्तर
भगवान शिव के भूतगण दैवीय भूतों की श्रेणी में आते हैं। ये वे गण हैं जिनकी रचना स्वयं देवताओं ने की है। उदाहरण के रूप में भगवान शिव के पार्षद नंदी, भृंगी आदि और भूतगण बताए गए हैं। ये मानवीय भूतों की तरह आसक्ति या अशुद्ध मृत्यु के कारण उत्पन्न नहीं होते, बल्कि ब्रह्मांडीय संतुलन बनाए रखने और देवताओं की आज्ञा का पालन करने का कार्य करते हैं।
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