ज्योतिर्लिंगशिव के ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होने की कथा क्या है लिंग पुराण के अनुसार?लिंग पुराण के अनुसार ब्रह्मा-विष्णु के श्रेष्ठता-विवाद में शिव अनंत प्रकाश स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) रूप में प्रकट हुए। विष्णु ने अंत न पाकर सत्य स्वीकारा; ब्रह्मा ने झूठ बोला तो श्राप मिला। वह अनंत ज्योति-स्तंभ ही ज्योतिर्लिंग कहलाया।#ज्योतिर्लिंग प्रकटन#लिंग पुराण#ब्रह्मा विष्णु विवाद
शिव अवतारशरभ अवतार क्यों और कैसे हुआ?शरभ अवतार नृसिंह भगवान के असंयत क्रोध को शांत करने के लिए हुआ। हिरण्यकश्यप के वध के बाद नृसिंह का क्रोध थमा नहीं। शिव ने आठ पैर वाले शरभ रूप में उन्हें पूंछ में लपेटकर क्रोध शांत किया।
कार्तिकेय और गणेश जन्मलिंग पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?लिंग पुराण: देवताओं ने दैत्यों के यज्ञों में विघ्न के लिए प्रार्थना की → शिव ने स्वयं दिव्य गजमुख स्वरूप प्रकट किया (हाथ में त्रिशूल और पाश) → विघ्नहर्ता और विघ्नकर्ता दोनों उपाधि दी।#गणेश जन्म#लिंग पुराण#विघ्नहर्ता
गणेश कथागणेश जी के विघ्नहर्ता नाम का क्या कारण है?लिंग पुराण के अनुसार भगवान शिव ने गणेश जी को देवताओं के शुभ कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर करने और दैत्यों के दुष्कर्मों में विघ्न डालने का दायित्व दिया। इसीलिए वे 'विघ्नहर्ता' कहलाए।#विघ्नहर्ता#गणेश#लिंग पुराण
शिव ग्रंथलिंग पुराण और शिव पुराण में क्या अंतर है?शिव पुराण: 7 संहिताएं, ~24,000 श्लोक, कथा+पूजा प्रधान (शिव विवाह, दक्ष यज्ञ, ज्योतिर्लिंग)। लिंग पुराण: 2 भाग, ~11,000 श्लोक, शिवलिंग दर्शन+ब्रह्मांड विज्ञान (28 शिव अवतार)। शिव पुराण = भक्तिमार्गी, लिंग पुराण = ज्ञानमार्गी।#लिंग पुराण#शिव पुराण#अंतर