गणेश पूजागणेश जी की पूजा से बुद्धि कैसे बढ़ती है?गणेश = ज्ञानमय (अथर्वशीर्ष)। स्वरूप: बड़ा सिर=बुद्धि, बड़े कान=ज्ञान ग्रहण, एक दांत=एकाग्रता। मूलाधार चक्र अधिपति → कुण्डलिनी → बुद्धि चक्र सक्रिय। बुध ग्रह संबंधित → बुद्धि कारक। उपाय: 108 जप, दूर्वा, अथर्वशीर्ष, बुधवार व्रत।#बुद्धि#गणेश#विद्या
मंत्र साधनागणेश जी का 'ग्लौम' बीज मंत्र और उसका प्रभाव'ग्लौं' पृथ्वी तत्व का बीज मंत्र है। इसके उच्चारण से जीवन, व्यापार और बुद्धि में स्थिरता आती है और जड़ जमा चुके बड़े-बड़े विघ्न आसानी से नष्ट हो जाते हैं।#गणेश#ग्लौम#बीज मंत्र
गणेश व्रतसंकट चतुर्थी व्रत की विधि और कथा क्या है?कृष्ण पक्ष चतुर्थी (मासिक)। संध्या पूजा, 21 दूर्वा, मोदक, 108 जप, कथा श्रवण। चंद्रोदय बाद पारण। कथा: ब्राह्मण→व्रत→संकट दूर। माघ चतुर्थी सर्वश्रेष्ठ।#संकट चतुर्थी#व्रत#विधि
लक्ष्मी-गणेशलक्ष्मी जी की पूजा में गणेश जी को पहले क्यों पूजते हैं?गणेश = प्रथम पूज्य (ब्रह्मा वरदान — बिना गणेश = विघ्न)। रिद्धि-सिद्धि पति + लक्ष्मी = सम्पूर्ण समृद्धि। बुद्धि पहले → धन बाद। दीपावली: गणेश→लक्ष्मी→सरस्वती→कुबेर।#गणेश#लक्ष्मी#पहले
गणेश पूजा नियमगणेश जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती?तुलसी ने विवाह प्रस्ताव → गणेश ने मना → तुलसी शाप → गणेश प्रति-शाप: 'मेरी पूजा में तुम वर्जित।' गणेश = दूर्वा; विष्णु = तुलसी। कुछ दक्षिण परंपरा में मान्य।#तुलसी#गणेश#वर्जित
गणेश पूजा सामग्रीगणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है और कितनी चढ़ाएं?अनलासुर निगलने → अग्नि ताप → 88,000 ऋषियों ने दूर्वा दी → शीतलता। 21 दूर्वा सर्वप्रचलित। 3/5 पत्ती गांठ, ताजी हरी, जड़ सहित। 101 = विशेष।#दूर्वा#गणेश#कारण
गणेश मंत्रगणेश अथर्वशीर्ष का पाठ कब और कैसे करें?अथर्ववेद उपनिषद्। चतुर्थी/बुधवार/प्रतिदिन। 1 बार शुभ, 11 बार सर्वसिद्धि। दूर्वा+मोदक+लाल फूल। शुद्ध उच्चारण। फल: 'ब्रह्मभूयाय कल्पते' — ब्रह्म प्राप्ति। सर्वशक्तिमान गणेश स्तोत्र।#अथर्वशीर्ष#गणेश#पाठ
इतिहास-पुराणमहाभारत किसने लिखा?महाभारत के रचयिता: महर्षि वेदव्यास (कृष्णद्वैपायन)। गणेश ने लेखनी से लिखा — परंपरागत आख्यान। एक लाख श्लोक, 18 पर्व। भगवद्गीता इसी का अंश। 'पंचम वेद' कहलाता है। व्यास ने 18 पुराण और ब्रह्मसूत्र भी रचे।#महाभारत#वेदव्यास#गणेश
शिव पूजा विधिशिव परिवार की पूजा कैसे करें और इसका क्या लाभ है?शिवलिंग = पूरे परिवार का प्रतीक। क्रम: गणेश→पार्वती→कार्तिकेय→शिव→नंदी। लाभ: पारिवारिक एकता, बुद्धि (गणेश), सौभाग्य (पार्वती), साहस (कार्तिकेय), कल्याण (शिव)। संतान सुख। शिक्षा: विरोधी वाहन फिर भी एकसाथ = एकता।#शिव परिवार#पार्वती#गणेश
मंत्र साधनारुका हुआ काम बनाने का गणेश मंत्रलंबे समय से अटके या रुके हुए कार्यों को पूरा करने के लिए भगवान गणेश के मंत्र 'ॐ वक्रतुण्ड महाकाय...' का उच्चारण कर घर से दायां पैर पहले बाहर निकालना चाहिए।#गणेश#रुका काम#विघ्नहर्ता
मंत्र साधनाबच्चों का पढ़ाई में मन लगाने का मंत्रबच्चों की चंचलता दूर कर पढ़ाई में मन लगाने के लिए, अध्ययन शुरू करने से पूर्व उनसे विघ्नहर्ता गणेश के मंत्र 'ॐ गं गणपतये नमः' का 11 बार उच्चारण करवाना चाहिए।#बच्चे#पढ़ाई#गणेश
दोष निवारणकर्ज उतारने का रामबाण मंत्रकर्ज के जाल से शीघ्र बाहर निकलने के लिए मंगल देव के मंत्र 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' और गणेश जी के 'ऋणहर्ता मंत्र' का नियमित रूप से जप करना रामबाण उपाय है।#कर्ज मुक्ति#मंगल देव#गणेश
मंत्र साधनाबच्चों की बुद्धि और याददाश्त बढ़ाने का मंत्रबच्चों की चंचलता दूर कर स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए उनसे प्रतिदिन माता सरस्वती के 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वत्यै नमः' और गणेश मंत्र का उच्चारण करवाना चाहिए।#बुद्धि#याददाश्त#सरस्वती
गणेश पूजागणेश जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है?पौराणिक कथा: बालक गणेश ने माता पार्वती देखकर पूरे शरीर पर सिंदूर लगाया (शिव प्रसन्नता हेतु) — शिव-पार्वती प्रसन्न, परंपरा आरंभ। अन्य: सिंदूर = शक्ति/शुभता। गणेश = मूलाधार चक्र अधिपति (लाल रंग)। शुद्ध सिंदूर ललाट + उदर पर लगाएं।#सिंदूर#गणेश#लाल रंग
गणेश पूजा सामग्रीगणेश जी को मोदक भोग क्यों प्रिय है — पौराणिक कारण?शिव-पार्वती प्रतियोगिता: गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा = ब्रह्मांड → विजयी → मोदक पुरस्कार। 'मोद' = आनंद। 21 मोदक। गुड़+नारियल/खोया।#मोदक#गणेश#प्रिय
गणेश पूजागणेश जी की पूजा से विघ्न कैसे दूर होते हैं?गणेश = विघ्नहर्ता + विघ्नेश्वर। शिव पुराण: प्रथम पूज्य वरदान — बिना गणेश पूजा कार्य अशुभ। अथर्वशीर्ष: 'ध्यान से सर्व विघ्न मुक्ति, महाविघ्न से भी।' विघ्न अधिपति: पूजा = विघ्न हटाएं, उपेक्षा = विघ्न आएं। उपाय: 108 जप, दूर्वा, मोदक, बुधवार/चतुर्थी पूजन।#विघ्नहर्ता#विघ्न नाश#गणेश
गणेश पूजाबुधवार को गणेश पूजा करने का क्या विशेष विधान है?बुधवार = बुद्धि दिवस, गणेश = बुद्धि देवता। विधान: पंचामृत अभिषेक, सिंदूर, 21 दूर्वा, मोदक, 108 जप, अथर्वशीर्ष/चालीसा, हरे मूंग प्रसाद। 21 बुधवार व्रत = मनोकामना पूर्ति। फल: बुद्धि, वाक्शक्ति, व्यापार लाभ, बुध शांति।#बुधवार#गणेश#बुध ग्रह
गणेश पूजागणेश जी के 12 नामों का जप कैसे करें?12 नाम: सुमुख, एकदन्त, कपिल, गजकर्णक, लम्बोदर, विकट, विघ्ननाशन, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचन्द्र, गजानन। फल (श्लोक): विद्यारंभ, विवाह, संग्राम, संकट — कहीं विघ्न नहीं। विधि: 'ॐ (नाम) नमः' 108 बार या श्लोक 11/21 बार।#द्वादश नाम#12 नाम#गणेश
योग अभ्यासयोग शुरू करने से पहले किसे प्रणाम करना चाहिए?योग शुरू करने से पहले गुरु, शिव, पार्वती, गणेश और शिष्यों सहित योगीश्वरों को प्रणाम करना चाहिए।#योग आरम्भ#गुरु प्रणाम#शिव
रुद्राष्टाध्यायी के अध्यायशिवसंकल्प सूक्त क्या है?शिवसंकल्प सूक्त = रुद्राष्टाध्यायी का प्रथम अध्याय। देवता: मन और गणेश। 'गणानां त्वा गणपति...' से आरंभ। मुख्य मंत्र: 'तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु' (मेरा मन शुभ संकल्पों वाला हो)। जाग्रत और सुषुप्त में मन नियंत्रित करता है।#शिवसंकल्प सूक्त#प्रथम अध्याय#गणेश
प्रमुख बीज मंत्रों का अर्थ'गं' (गणपति बीज) का क्या अर्थ है?'गं' = भगवान श्री गणेश का गणपति बीज। 'ग' = गणेश, बिंदु = विघ्नहर्ता/दुःखहर्ता। अर्थ: 'भगवान गणेश मेरे समस्त विघ्नों और दुःखों को दूर करें।' यह साधना मार्ग की सभी बाधाओं का नाश करता है।#गं गणपति बीज#गणेश#विघ्नहर्ता
शिव शाबर मंत्रभंडार भरण मंत्र में शिव परिवार का ध्यान क्यों किया जाता है?शिव परिवार की समग्र ऊर्जा (समृद्धि, बुद्धि, शक्ति) को जीवन में स्थापित करने के लिए उनका ध्यान होता है।#शिव परिवार#गौरा#गणेश
देवी-देवता पूजनगणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाते हैं?मुद्गल पुराण के अनुसार अनलासुर राक्षस को निगलने के बाद गणेश जी के पेट में जलन हुई, जो केवल 21 दूर्वा खाने से शांत हुई। तभी से गणेश को दूर्वा अर्पण की परंपरा है। दूर्वा गणेश को सर्वाधिक प्रिय है।#गणेश#दूर्वा#दूब
गणेशकर्ज से मुक्ति पाने के लिए ऋणहर्ता मंत्र का महत्व और विधि क्या हैकर्ज मुक्ति के लिए 'ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरण्यं हुं नमः फट्' मंत्र और ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।#कर्ज मुक्ति#ऋणहर्ता#गणेश
तीर्थ यात्राअष्टविनायक मंदिर कहाँ कहाँ हैं कैसे पहुंचेंमहाराष्ट्र 8 गणेश मंदिर: मोरगांव, सिद्धटेक, पाली, महड, थेउर, लेण्याद्रि, ओझर, रांजणगांव। पुणे केंद्र; 2-3 दिन; ~600-700km सर्किट। मोरगांव से शुरू।#अष्टविनायक#गणेश#महाराष्ट्र
दैनिक आचारमहत्वपूर्ण काम से पहले कौन सा मंत्र जपें'ॐ गं गणपतये नमः' 11 बार (30 सेकंड) — विघ्न निवारण। या 'वक्रतुण्ड महाकाय...'। हनुमान (बल), सरस्वती (बुद्धि), गायत्री (सार्वभौमिक)। गणेश = प्रथम पूज्य = किसी भी कार्य का आरंभ।#महत्वपूर्ण काम#मंत्र#गणेश
दैनिक आचारनया वाहन खरीदने पर कौन सी पूजा करेंगणेश पूजा + नारियल + स्वस्तिक + माला। शुभ मुहूर्त में पहली सवारी। हनुमान/गणेश चित्र वाहन में। प्रथम यात्रा = मंदिर। सुरक्षा: महामृत्युंजय।#वाहन#पूजा#गणेश
दैनिक आचारनई नौकरी ज्वाइन करने पर कौन सी पूजागणेश (विघ्न निवारण) + सरस्वती (बुद्धि) + हनुमान (शक्ति) पूजा। ज्वाइनिंग दिन: ईश्वर स्मरण, आशीर्वाद, दही-चीनी, 'ॐ गं गणपतये नमः' 11 बार।#नौकरी#पूजा#सफलता
दैनिक आचारव्यापार शुरू करने से पहले कौन सी पूजागणेश (विघ्न निवारण) + लक्ष्मी (धन) + सरस्वती (बुद्धि) पूजा। शुभ मुहूर्त, गणेश-लक्ष्मी हवन, श्री यंत्र स्थापना। पहला लाभ दान करें। 'ॐ श्रीं...' लक्ष्मी मंत्र।#व्यापार#पूजा#गणेश
दैनिक आचारपरीक्षा में सफलता के लिए कौन सी पूजा करेंसरस्वती ('ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः') + गणेश ('ॐ गं गणपतये नमः') + हयग्रीव (ज्ञान अवतार)। नियमित पढ़ाई = सबसे बड़ी पूजा। पूजा + मेहनत = सफलता। पूजा मेहनत का विकल्प नहीं।#परीक्षा#सफलता#सरस्वती
दैनिक आचारयात्रा पर जाने से पहले कौन सा मंत्र पढ़ेंगणेश ('ॐ गं गणपतये नमः'), हनुमान चालीसा (सुरक्षा), महामृत्युंजय (दुर्घटना रक्षा)। दही-चीनी खाकर, कुल देवता स्मरण करके निकलें।#यात्रा#मंत्र#सुरक्षा
दैनिक आचारघर से निकलते समय कौन सा मंत्र बोलेंगणेश: 'वक्रतुण्ड महाकाय...' (विघ्न निवारण) या 'ॐ गं गणपतये नमः'। हनुमान स्मरण। दाहिने पैर से निकलें। माता/बड़ों का आशीर्वाद। द्वार पर प्रणाम।#घर से निकलना#मंत्र#सुरक्षा
स्वप्न शास्त्रसपने में हाथी दिखने का क्या मतलबहाथी = अत्यंत शुभ। गणेश कृपा, राजयोग, धन-समृद्धि, बुद्धि, दीर्घायु। सफेद हाथी=दुर्लभ सौभाग्य; सवारी=उच्च पद; शांत=धैर्य; क्रोधित=सावधानी। शकुन शास्त्र में भी शुभ। सर्वसम्मत शुभ सपना।#हाथी#सपना#गणेश
पौराणिक कथागणेश जी का सिर क्यों कटा और हाथी सिर कैसे लगापार्वती ने उबटन से बालक बनाया, द्वारपाल नियुक्त किया। शिव को रोकने पर शिव ने क्रोध में सिर काटा। पार्वती के क्रोध पर शिव ने हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया। वरदान: सर्वप्रथम पूज्य। आध्यात्मिक: मानव सिर कटना = अहंकार नाश; गज सिर = बुद्धि, विवेक।#गणेश#सिर कटना#हाथी
पूजा विधिपूजा घर में दो गणेश जी की मूर्ति रख सकते हैं क्यालोक परंपरा में पूजा घर में एक ही गणेश मूर्ति रखना उत्तम माना जाता है — दो रखने से विघ्न बने रहने की मान्यता है। शास्त्रों में कोई स्पष्ट निषेध नहीं है। टूटी मूर्ति न रखें, संदेह हो तो कुल पंडित से पूछें।#गणेश#मूर्ति#पूजा घर
लक्ष्मी उपासनादीपावली पर लक्ष्मी पूजा से पहले गणेश पूजा क्यों करते हैंगणेश पहले क्यों: (1) शिव का वरदान — सर्वप्रथम पूज्य। (2) विघ्नहर्ता — पूजा में बाधा न आए। (3) बुद्धि पहले, धन बाद — विवेकपूर्ण धन उपयोग। (4) रिद्धि-सिद्धि = लक्ष्मी को आकर्षित। (5) लक्ष्मी: जहाँ गणेश पूजा, वहीं मेरा निवास। क्रम: गणेश → लक्ष्मी → सरस्वती → कुबेर।#दीपावली#गणेश#लक्ष्मी
गणेश उपासनागणेश विसर्जन के बाद मूर्ति घर में रख सकते हैं या नहींगणेश मूर्ति: मिट्टी/POP = अस्थायी, विसर्जन अनिवार्य (आवाहन हुई हो)। धातु/पत्थर = स्थायी, घर में रखें, नित्य पूजा। विसर्जित मूर्ति वापस न रखें। इको-फ्रेंडली: शुद्ध मिट्टी, बाल्टी विसर्जन → मिट्टी बगीचे में। पीढ़ियों की धातु मूर्ति = पूर्णतः शुभ।#गणेश#विसर्जन#मूर्ति
गणेश उपासनागणेश पूजा में दूर्वा कैसे तोड़ें और कब तोड़ेंगणेश दूर्वा: 3/5 पत्तियों वाली, हरी-ताज़ी, गाँठ सहित। 21 संख्या उत्तम। प्रातः तोड़ें, रविवार वर्जित (कुछ में)। जड़ न उखाड़ें, सूखी/पीली वर्जित। धोकर, 'ॐ गं...' बोलकर मस्तक पर। कथा: अनलासुर ताप शमन हेतु 21 दूर्वा → शीतलता।#गणेश#दूर्वा#घास
गणेश उपासनागणेश जी को कौन से फल प्रिय हैंगणेश प्रिय फल: केला (सर्वप्रिय, अनिवार्य), जामुन, अनार, सेब, आम, बेर, नारियल, अमरूद। मोदक = सबसे प्रिय भोग। विषम संख्या (1/3/5/7)। 5 प्रकार के फल (चतुर्थी)। ताज़े, शुद्ध, बिना कीड़े।#गणेश#फल#केला
गणेश उपासनागणेश जी को लड्डू कितने अर्पित करने चाहिएगणेश लड्डू: 1 (न्यूनतम), 5, 11 (अत्यन्त शुभ), 21, 108। विषम संख्या प्रचलित। मोदक = सर्वप्रिय ('मोदकप्रिय')। बेसन/बूँदी लड्डू भी मान्य। शुद्ध घी। 'ॐ गं गणपतये नमः' बोलकर अर्पित। चतुर्थी = 21/108 विशेष।#गणेश#लड्डू#मोदक
गणेश उपासनागणेश जी की मूर्ति का मुख किस दिशा में होना चाहिएगणेश दिशा: मुख पूर्व/पश्चिम। सूँड: बायीं (सर्वोत्तम — सौम्य, गृहस्थ शुभ, कम नियम), दायीं (सिद्धिविनायक — कठोर नियम), सीधी (योगी)। स्थान: ईशान कोण। प्रवेश पर मुख बाहर। घर = बायीं सूँड सबसे अच्छा।#गणेश#मूर्ति#दिशा
व्रतसंकष्टी चतुर्थी व्रत कैसे रखेंसंकष्टी चतुर्थी: कृष्ण पक्ष चतुर्थी, गणेश व्रत। प्रातः स्नान → संकल्प → दिनभर उपवास → सायं गणेश पूजा (दूर्वा, मोदक, लाल फूल) → 'ॐ गं गणपतये नमः' 108 बार → चन्द्रोदय पर चन्द्र दर्शन + अर्घ्य → तभी पारण। मंगलवार = अंगारकी (अत्यन्त शुभ)।#संकष्टी#चतुर्थी#गणेश
नित्य मंत्रदुकान खोलते समय कौन सा मंत्र बोलें?दुकान मंत्र: गणेश (वक्रतुण्ड...) → लक्ष्मी (ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः) → कुबेर मंत्र। विधि: गंगाजल छिड़काव → दीपक-अगरबत्ती → मंत्र → प्रणाम → गल्ले पर स्वस्तिक। धनतेरस, दीपावली पर विशेष पूजा।#दुकान मंत्र#व्यापार मंत्र#लक्ष्मी
दैनिक कर्मनया कार्य शुरू करने से पहले कौन सा मंत्र बोलेंनया कार्य शुरू करने से पहले: गणेश वन्दना — 'वक्रतुण्ड महाकाय... निर्विघ्नं कुरु मे देव'। बीज मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः' (11/21 बार)। ज्ञान कार्य हेतु सरस्वती वन्दना। ऋग्वेद: 'ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे'। गणेश प्रथम पूज्य — सभी शुभ कार्य उनकी वन्दना से आरम्भ होते हैं।#शुभारम्भ#गणेश#विघ्न निवारण
मंत्रपरीक्षा से पहले कौन सा मंत्र बोलने से सफलता मिलती हैपरीक्षा हेतु: (1) 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' — सरस्वती बीज मंत्र। (2) सरस्वती वन्दना — 'या कुन्देन्दुतुषारहारधवला'। (3) 'ॐ गं गणपतये नमः'। (4) हनुमान चालीसा — 'बुद्धिहीनतनु जानिके'। (5) गायत्री मंत्र — बुद्धि प्रेरणा। मंत्र + नियमित अध्ययन = सफलता।#परीक्षा#विद्या#सरस्वती
दैनिक कर्मयात्रा से पहले कौन सा मंत्र बोलेंयात्रा से पहले: (1) गणेश मंत्र — 'वक्रतुण्ड महाकाय... निर्विघ्नं कुरु मे देव' (2) विष्णु स्मरण — 'मंगलं भगवान् विष्णुः' (3) हनुमान स्मरण। 'ॐ गं गणपतये नमः' 11 बार जपें। इष्टदेव को प्रणाम, दही-शक्कर, दाहिना पैर पहले — परम्परागत शुभ विधान।#यात्रा मंत्र#गणेश#सुरक्षा
मंदिर वास्तुमंदिर में गणपति प्रतिमा सबसे पहले क्यों स्थापित की जाती है?कारण: (1) ऋग्वेद: 'गणानां त्वा गणपतिं हवामहे' = प्रथम आवाहनीय (2) विघ्नहर्ता — प्रारम्भ में पूजन = विघ्न पूर्व-निवारण (3) शिवपुराण कथा — माता-पिता प्रदक्षिणा = प्रथम पूज्य वरदान। स्थान: प्रवेश द्वार पर/अलग मंडप। सर्वत्र: निर्माण, प्राण प्रतिष्ठा, विवाह, हवन, पत्र — सब में पहले।#गणपति#प्रथम पूज्य#विघ्नहर्ता
गणेश पूजागणेश पूजा में अभिषेक की विधि क्या है?अथर्वशीर्ष: 'अभिषेक से वाग्मी होता है।' विधि: पंचामृत (दूध→दही→घी→शहद→शर्करा) + गंगाजल, 'ॐ गं गणपतये नमः' सहित। पश्चात: सिंदूर तिलक, दूर्वा, मोदक भोग। तुलसी वर्जित। फल: वाक्शक्ति, बुद्धि, विघ्न नाश।#अभिषेक#गणेश#पंचामृत
गणेश पूजा सामग्रीगणेश जी की पूजा में 21 दूर्वा क्यों चढ़ाते हैं?अनलासुर कथा: 88,000 ऋषियों ने 21-21 दूर्वा दीं → शीतलता। 21 = 5 ज्ञानेंद्रिय + 5 कर्मेंद्रिय + 5 तन्मात्रा + 5 महाभूत + 1 मन = 21 तत्व = सम्पूर्ण। ताजी हरी, गांठ सहित।#21 दूर्वा#गणेश#कारण
गणेश पूजागणेश अथर्वशीर्ष का पाठ 21 बार करने से क्या होता है?मूल ग्रंथ: 1 बार = विघ्न नाश, पंच पाप मुक्ति। 1000 बार = सर्व कामना सिद्धि (श्लोक 13)। चतुर्थी उपवास + जप = विद्यावान (श्लोक 14)। 21 बार (संकष्टी/बुधवार) = दोगुना फल — परंपरागत मान्यता (मूल ग्रंथ में 21 संख्या स्पष्ट नहीं)। फल: ग्रह दोष शांति, आर्थिक सुधार, बुद्धि वृद्धि।#अथर्वशीर्ष#21 बार#गणेश